आधार कार्ड से खुला पोल : … तो यह था मोइनुद्दीन की मौत का सच.., फिर से दसवीं की परीक्षा दी और बन गया मोहिन सिसोदिया 

Latest Hindi news and inside story : सेना की आंखों में धूल झोंककर सैनिक बनने का अजमेर के मोइनुद्दीन का कुत्सित प्रयास तब चूर-चूर हो गया, जब झूठ और फर्जीवाड़े की बुनियाद पर सेना में शामिल होने की कहानी सार्वजनिक मंच पर आ गई। भारतीय सेना ने प्रशिक्षण की ही अवधि में उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। बहरहाल, सेना ने उसे निलंबित कर दिया है। दरअसल, मोइनुद्दीन को सेना में शामिल होने का जुनून कुछ इस हद तक परवान चढ़ा कि उसने जिंदा होते हुए पहले खुद का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया, फिर नाम बदलकर सेना में भर्ती भी हो गया। हालांकि, रक्षा मंत्रालय में की गई एक शिकायत ने उसके गलत मंसूबे पर पानी फेर डाला। राजस्थान के अजमेर जिले के बांदरसिंदरी थाना क्षेत्र के देसवाली ढाणी निवासी मोइनुद्दीन के इस फर्जीवाड़े में उसके परिजनों के साथ-साथ पंचायत तक की भूमिका परिलक्षित हुई है। 

मृत घोषित करने में परिवार से लेकर पंचायत तक की भूमिका

मोइनुद्दीन का छोटा भाई आसिफ 2018 में सेना में सैनिक के पद पर चयनित हुआ था। उसकी शानोशौकत देख मोइनुद्दीन ने भी सेना में जाने की सोच बनाई। उस बीच भर्ती रैली नहीं हुई और कोरोना का आगमन हो गया। चूंकि, मोइनुद्दीन का जन्म 1998 में हुआ था। ऐसे में अधिक उम्र हो जाने से सेना में उसका चयन नहीं हो सकता था। ऐसे में पहले उसने खुद का मृत्य प्रमाणपत्र बनवाया। इसके लिए उसके पिता मोहम्मद नूर ने सरपंच को अपने विश्वास में लिया, जिसने  2019 में मोइनुद्दीन की मौत की पुष्टि कर दी, जिस पर ग्रामसचिव ने भी मुहर लगा दी और उसका मृत्यु प्रमाणपत्र तक जारी कर दिया गया।

…और मोइनुद्दीन बन गया मोहिन सिसोदिया 

फिर से दी 10वीं की परीक्षा और मोइनुद्दीन बन गया मोहिन

फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर मोइनुद्दीन  ने नए नाम से 10वीं कक्षा की परीक्षा दी। यह नाम था  मोहिन सिसोदिया। इसी नाम से वह सेना में भर्ती हो गया। इधर, उसके सैनिक बनने की खबर जब गांव वालों तक पहुंची तो गांव के ही गफूर ने रक्षा मंत्रालय तक यह बात पहुंचाई और गड़बड़झाले का पर्दाफाश हो गया।

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