आरा (भोजपुर)। प्रतिभा किसी उम्र, स्थान या संसाधनों की मोहताज नहीं होती—इस कथन को साकार कर दिखाया है भोजपुर जिले के एक छोटे से गांव मुकुंदपुर के बाल कलाकार अजिंक्य मिश्रा ने। महज 14 वर्ष की उम्र में फिल्म ‘धुरंधर’ में अपने प्रभावशाली अभिनय के जरिए अजिंक्य ने न केवल दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
चरपोखरी प्रखंड अंतर्गत मुकुंदपुर गांव निवासी जयशंकर मिश्रा के पुत्र अजिंक्य मिश्रा ने जिस गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ एक चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाया है, वह उसकी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व नजर आता है। कम उम्र में इतने भावनात्मक दृश्य निभाना आसान नहीं होता, लेकिन अजिंक्य ने अपने अभिनय से यह साबित कर दिया कि वह एक असाधारण प्रतिभा का मालिक है।
फिल्म ‘धुरंधर’ में फैजल बलोच के किरदार ने छोड़ी गहरी छाप
निर्देशक आदित्य धर की बहुचर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ में अजिंक्य मिश्रा ने अभिनेता अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए कुख्यात किरदार रहमान डकैत के छोटे बेटे फैजल बलोच की भूमिका निभाई है। यह किरदार कहानी में भावनात्मक संतुलन और मानवीय संवेदना का प्रतिनिधित्व करता है।
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जहां एक ओर रहमान डकैत का चरित्र अपराध, हिंसा और भय का प्रतीक है, वहीं उसका बेटा फैजल मासूमियत, डर और भावनात्मक संघर्ष का चेहरा बनकर उभरता है। गैंगवार के दौरान हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में बड़े भाई की आंखों के सामने हत्या होते देख फैजल के चेहरे पर उभरा डर, सदमा और असहायता दर्शकों को झकझोर देता है। इन दृश्यों में अजिंक्य का अभिनय फिल्म का भावनात्मक केंद्र बन जाता है।
छोटे शहरों के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत
अजिंक्य मिश्रा का यह सफर उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है, जो गांव या छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखते हैं। उसकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर मेहनत, लगन और परिवार का साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
नाम में छिपा संघर्ष और अजेय साहस
अजिंक्य के बाबा चंदेश्वर मिश्रा बताते हैं कि उसके नाम का अर्थ ही अजेय है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। अजिंक्य का जन्म इंदौर में हुआ, लेकिन उसकी जड़ें भोजपुर जिले के मुकुंदपुर गांव से जुड़ी हैं। बचपन से ही उसे अभिनय में रुचि थी और वह अक्सर किरदारों की नकल कर लोगों को प्रभावित करता था।
मॉडलिंग से अभिनय तक का सफर
अजिंक्य ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की। इसके बाद मुंबई जाकर उसने कई विज्ञापनों में काम किया, जिससे उसे कैमरे के सामने आत्मविश्वास और सहजता मिली। धीरे-धीरे उसे टेलीविजन धारावाहिकों में काम करने का मौका मिला और उसके अभिनय को सराहना मिलने लगी।
टीवी से फिल्मों तक की उड़ान
अजिंक्य इस समय मुंबई में रहकर पढ़ाई के साथ-साथ अभिनय कर रहा है और नौवीं कक्षा का छात्र है। उसके बड़े पापा विकास मिश्रा के अनुसार, अजिंक्य ने टीवी सीरियल ‘दिल तो हैप्पी है जी’ से अपने अभिनय करियर की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद उसने फिल्म ‘राष्ट्रकवच ओम’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। हाल ही में वह नेटफ्लिक्स वेब सीरीज ‘सिंगल पापा’ में अभिनेता कुणाल खेमू के साथ भी नजर आ चुका है।
अजिंक्य की सफलता के पीछे उसके माता-पिता का अहम योगदान रहा है। पिता जयशंकर मिश्रा, जो एक मेडिकल कंपनी में कार्यरत हैं, ने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। वहीं मां रेणुबाला मिश्रा ने हर कदम पर भावनात्मक सहयोग देकर उसका हौसला बढ़ाया।
‘धुरंधर’ जैसी फिल्म में रणवीर सिंह, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल और संजय दत्त जैसे दिग्गज कलाकारों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन अजिंक्य मिश्रा ने अपने अभिनय से यह कर दिखाया।
निश्चित रूप से यह सफर अभी शुरुआत भर है। प्रतिभा, मेहनत और पारिवारिक समर्थन के साथ अजिंक्य मिश्रा आने वाले समय में अभिनय की दुनिया में नई ऊंचाइयों को छुएगा और भोजपुर जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेगा।



