बड़ा फैसला : भारत और रूस मिलकर बनाएंगे ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल

भारत और रूस संयुक्त उद्यम अगले पांच-छह वर्षों में ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सक्षम होगा। दोनों देशों ने अत्याधुनिक सैन्य साझेदारी कार्यक्रमों में से एक अविश्वसनीय यात्रा को चिह्नित करने के लिए दुनिया की सबसे शक्तिशाली आधुनिक सटीक स्ट्राइक ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन किया है। भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने सोमवार को ‘सिल्वर जुबली ईयर’ समारोह की शुरुआत की है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में भारत और रूस सक्षम

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और एमडी अतुल राणे सोमवार को ‘सिल्वर जुबली ईयर’ समारोह की शुरुआत के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत-रूस रक्षा संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। अगले पांच से छह साल में भारत और रूस मिलकर अपनी पहली ऐसी मिसाइल बनाने में सक्षम होंगे। ब्रह्मोस मिसाइल के पहले सुपरसोनिक लॉन्च के 21 गौरवशाली वर्षों को चिह्नित करने के लिए शुरू हुआ ‘रजत जयंती वर्ष’ समारोह 12 फरवरी 2023 को ‘ब्रह्मोस स्थापना दिवस’ पर खत्म होगा। 

सिल्वर जुबली ईयर समारोह में कई कार्यक्रम होंगे

उन्होंने आगे कहा कि ‘सिल्वर जुबली ईयर’ समारोह के दौरान कई प्रमुख कार्यक्रमों, सम्मेलनों और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन करने की योजना बनाई गई है। इस दौरान देश के भीतर मिसाइल निर्माण उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में संयुक्त उद्यम के प्रमुख उद्योग भागीदारों के अमूल्य योगदान को उजागर किया जायेगा। इसके अलावा दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली का संचालन करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के योगदान और व्यावसायिकता को स्वीकार करने के लिए एक यूजर इंटरेक्शन मीटिंग भी होगी।

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