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इस एयरोस्पेस इंजीनियरिंग वाले बाबा के बारे में जानेंगे तो भागेंगे महाकुंभ की ओर…

इस एयरोस्पेस इंजीनियरिंग वाले बाबा के बारे में जानेंगे तो भागेंगे महाकुंभ की ओर…

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KumbhNagar news : 13 जनवरी 2025 से 12 वर्षों के बाद प्रयागराज में महाकुंभ शुरू हुआ है। इसकी महिमा हिंदू धर्म संस्कृति के अनुसार अपरंपार है। संगम घाट पर गंगा, यमुना और सरस्वती की सम्मिलित धारा में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों के धूल जाने का विश्वास है। इसके साथ ही यहां एक से बढ़कर एक साधुओं का जमावड़ा होता है।

हर बाबा की अपनी खासियत

सभी साधुओं की अपनी-अपने अलग-अलग खासियत होती है। सबकी साधना के पीछे कोई ना कोई कारण होता है और जब उसकी जानकारी मिलती है तो बहुत लोग उसे अच्छा तो बहुत लोगों से खराब भी कहते हैं। अब कोई बड़ा इंजीनियर या बड़ा साइंटिस्ट साधु बन जाए तो इसे देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। लेकिन, उसकी आत्मा के संसार में मानव हित ही बसा हुआ होता है। महाकुंभ में एक खास आईआईटीयन बाबा हैं, जिन्हें लेकर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। यह बाबा हैं अभय बाबाएयरोस्पेस इंजीनियरिंग वाले बाबा

इंजीनियरिंग के साथ फिलॉसफी भी पढ़े हैं

सोशल मीडिया की चर्चा के मुताबिक, अभय हरियाणा के झज्जर के हैं। अभय सिंह ने कई मीडिया इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की है और उनका सब्जेक्ट एयरोस्पेस था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सिलेक्शन हुआ और उन्हें एक कंपनी से लाखों का पैकेज ऑफर हुआ था. उन्होंने कुछ दिन नौकरी की। अभय ने इंजीनियरिंग के दौरान ह्यूमैनिटी के अलग विषय पढ़े, जिसमें फिलॉसॉफी से जुड़े हुए अलग-अलग विषय पढ़े। जिंदगी का मतलब समझने के लिए नवउत्तरावाद, सुकरात, प्लेटो के आर्टिकल और किताबें पढ़ीं। इसके बाद उनके सोच की दिशा बदल गई। फिर वह धीरे-धीरे अध्यात्म के रास्ते की ओर बढ़ते हुए शांति की तलाश करने लगे। उनकी शांति की तलाश के पीछे मानव हित।

प्रेम में धोखा की चर्चा, साथ में शिवभक्त भी

इसके विपरीत सोशल मीडिया पर इंजीनियर बाबा को लेकर चर्चा चल रही है कि उन्होंने प्रेम में एक लड़की से मिले धोखे के बाद सांसारिक मोह माया त्याग कर भगवान की शरण ली। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि इंजीनियर बाबा बेरोजगारी से त्रस्त होकर निराशा हो गए और बाबा बने निकल गए। पैदल उत्तराखंड में अलग-अलग जगह और हिमाचल में अलग-अलग जगह की यात्रा करी और जीवन को जानने की कोशिश की। अब इंजीनियर बाबा ने अपनी पूरी जिंदगी भगवान शिवशंकर को समर्पित कर दी है।

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