Ranchi news: अखिल भारतीय साहित्य परिषद ‘राँची’ ईकाई एवं श्री साहित्य कुंज ‘राँची’ के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय नववर्ष ‘विक्रम संवत 2082’ के अभिनंदन हेतु काव्य संध्या का आयोजन मोराबादी के आक्सीजन पार्क में किया गया। विधिवत रूप से माँ वाणी की आराधना के साथ माँ भारती के गुणगाण से गोष्ठी का आरंभ हुआ। इस गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासविद , अधिवक्ता असित कुमार ने किया। वहीं मुख्य अतिथ्य में रिटायर डी.एस.पी. कामेश्वर कुमार और विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद पकंज पुष्कर रहे। श्री साहित्य कुंज की अध्यक्ष प्रतिमा त्रिपाठी की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सरस्वती वंदना सिम्मी नाथ ने की। वहीं गोष्ठी का सफल संचालन भावना अम्बष्टा ने किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राँची ईकाई की अध्यक्ष मनीषा सहाय ‘सुमन’ ने गोष्ठी में आये सभी रचनाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2082 के शुभारंभ का यह आयोजन सार्वजनिक स्थान पर करने का उदेश्य है कि हम अपनी संस्कृति संस्कार सनातन प्रतिबद्धता के प्रति जागरूक हों। पाश्चात्य संस्कृति ने हमें हर ओर से नैतिक पतन और बिखराव दिया है। अत: हमारे समाज व राष्ट्र को सुदृढ़ और संगठित बनाने के लिये सनातन विचारों का प्रवाह व प्रतिबद्धता दोनो़ ही जरूरी है।
कुंज की अध्यक्ष प्रतिमा त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में सभी को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाओं के साथ समाज के प्रति रचनाकार लेखकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए भारतीयता पर गर्व करने का संदेश दिया। आयोजन की अध्यक्षता कर रहे असित कुमार ने कहा कि “भारत विश्व की प्राचीनतम सभ्यता व संस्कृतिक धरोहर का राष्ट्र रहा है। यह गर्व का विषय है। इस काव्य गोष्ठी में पुष्पा सहाय,भावना अम्बष्ठा, ऋतुराज वर्षा, मधुमिता साहा,सिम्मी नाथ ,निर्मला कर्ण, सुनीता अग्रवाल, पूनम वर्मा, चेतना यादव, रंजन बरनवाल, राज जी यादव पंकज पुष्कर, कामेश्वर कुमार, बालाशंकर,अमन निराला, रंजन वर्णवाल, शिवांगी कुमारी आदि नें अपनी कविता पाठ से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।