Kolkata news : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कोलकाता के साइंस सिटी में आयोजित गौड़ीय मिशन के संस्थापक आचार्य श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद की 150वीं जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने भारत की आध्यात्मिक चेतना को उसकी दीर्घकालिक सभ्यता का मूल कारण बताया और कहा कि यह चेतना सदियों से अटूट बनी हुई है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गौड़ीय मिशन ने सनातन धर्म को विश्व में प्रेम, शांति और सौहार्द का मार्ग बनाने का कार्य किया है। उन्होंने प्रभुपाद को भारतीय आध्यात्मिक चिन्तन को पश्चिमी देशों में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभानेवाला व्यक्तित्व बताया।
धनखड़ ने कहा कि प्रभुपाद ने सुभाषचंद्र बोस, मदन मोहन मालवीय जैसे महान भारतीय नेताओं को भी प्रेरित किया था। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव सहित कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि आचार्य श्रील ने आध्यात्मिक साहित्य के प्रचार के लिए प्रिंटिंग प्रेस का उपयोग किया, जिससे भारतीय दर्शन को कई भाषाओं में प्रकाशित कर विश्वभर में उपलब्ध कराया।
‘विकसित भारत’ बनाने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने सभी से आचार्य प्रभुपाद के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ह्ण के संकल्प को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
इस समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस और पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस व पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी सहित कई गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने तारापीठ मंदिर में टेका माथा, मां तारा का लिया आशीर्वाद
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने धर्मपत्नी सुदेश धनखड़ के साथ शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला स्थित सुप्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में पूजा-अर्चना की।
तारापीठ मंदिर से बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा, ‘इस पवित्र स्थल के दर्शन कर अद्भुत शांति और ऊर्जा मिली। इसे मानवता के कल्याण में उपयोग करूंगा।’