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छत्तीसगढ़ का बस्तर, जहां इंसान सुनाते हैं देवताओं को सजा

रांची से आनंद सिंह की रिपोर्ट
क्या आपको पता है कि भारत में एक राज्य ऐसा भी है, जहां बाकायदा कोर्ट लगाकर देवताओं को सजा दी जाती है? चौंक गए? देवताओं को सजा? जी हां! चौंकिए मत। यह बात सोलहों आने सत्य है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के लोगों की एक खासियत है। ये अपने देवी-देवताओं का साथ कभी नहीं छोड़ते। जन्म से लेकर मृत्यु तक, शादी से लेकर अंतिम संस्कार तक ये देवी-देवताओं को मानते हैं। धनरोपनी करेंगे तो देवी देवताओं के साथ, धान के बिछड़े छीटेंगे तो भगवान के साथ, फसल की रखवाली करेंगे तो भगवान के साथ। फसल की कटाई करेंगे, उसे बाजार में बेचेंगे तो भगवान के साथ। माने ये हर स्वांस में भगवान को साक्षी मानते हैं और भगवान से अपनी बोली में बात भी करते हैं।
इस संबंध में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि बस्तर के ये लोग भगवान से रूठते भी हैं, नाराज भी होते हैं। कई लोग भगवान से कहते हैं कि ये काम जरूरी है। ये हमसे नहीं हो पा रहा है। आप कर दीजिए। अगर भगवान ने वह काम कर दिया तो ठीक, नहीं तो खैर नहीं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक जाने माने यूटुबर समदिश के साथ बातचीत में ये खासमखास जानकारी दी। उन्होंने कहा: मान लीजिए मैंने भगवान को एक काम दिया कि ये कर दो और उन्होंने नहीं किया तो बाकायदा बस्तर के एक गॉंव में अदालत लगती है। उस अदालत में सैकड़ों लोग होते हैं। एक आदमी काम के बारे में बताता है और संबंधित पक्ष उसे कन्फर्म करता है कि काम हुआ अथवा नहीं। काम नहीं होता है तो भगवान को सजा सुनाई जाती है। दंड का भी प्रावधान है। दुनिया के किसी गांव/शहर में इंसानों द्वारा भगवान को सजा नहीं दी जाती।ये सिर्फ छतीसगढ़ के बस्तर में ही होता है।

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