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Child Maoist Surrender: सारंडा से कार्बाइन के साथ आया बाल नक्सली, ओडिशा पुलिस को मिली कामयाबी

Child Maoist Surrender: सारंडा से कार्बाइन के साथ आया बाल नक्सली, ओडिशा पुलिस को मिली कामयाबी

राउरकेला : सारंडा के घने जंगलों से कार्बाइन के साथ निकला महज 15 वर्ष का माओवादी इन दिनों झारखंड-ओडिशा की सीमा पर चर्चा का विषय बना है। बहरहाल, इस बाल माओवादी ने खुद को ओडिशा पुलिस के हवाले कर दिया है।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जमादा थाना क्षेत्र निवासी यह माओवादी विस्फोटक लूटकांड, रेलवे ट्रैक ब्लास्ट और आइईडी विस्फोट जैसी कई माओवादी घटनाओं में शामिल रहा है।

रप्पा और गुंगा ने बहकाया

आत्मसमर्पण करने वाला यह बाल माओवादी सारंडा वन क्षेत्र के बीहड़ में सक्रिय माओवादी के दक्षिण छोटानागरा डिवीजन का सदस्य था। मात्र 12 वर्ष की उम्र में वर्ष 2022 में रप्पा और गुंगा के बहकावे में आकर वह माओवादी संगठन से जुड़ गया था। बाद में वह कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में मोछू के नेतृत्व में काम करता रहा।

दहलाने के लिए झारखंड की सीमा से सटे जंगलों में छिपाए गए थे विस्फोटक

पुलिस के अनुसार नाबालिग समेत 70-80 माओवादियों ने पिछले दिनों बांको स्टोन क्वारी से विस्फोटक लूट की योजना बनाकर कैम्प किए हुए थे। नाबालिग उस समय सेंट्री ड्यूटी में था और आसपास की सूचना माओवादियों को देता था। लूट के बाद संगठन के निर्देश पर भारी मात्रा में विस्फोटक झारखंड सीमा से सटे जंगलों में छिपाए गए थे।

रखा गया बी श्रेणी में, मिलेगा प्रतिमाह 10,000 वजीफा

डीआईजी पश्चिम रेंज ब्रजेश राय के अनुसार बाल माओवादी को ‘बी’ श्रेणी में रखा गया है। उसे सरकार की पुनर्वास योजना के तहत 1.65 लाख की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें से 50 हजार नकद तत्काल जरूरतों के लिए और शेष राशि एफडी के रूप में जमा की जाएगी। इसके अलावा उसे 10,000 प्रतिमाह का वजीफा अधिकतम 36 माह तक मिलेगा। सरकार की नीति के अनुसार अविवाहित होने पर उसे 25,000 की एकमुश्त विवाह प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। साथ ही उसे निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वास्थ्य कार्ड और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राशन लाभ भी प्राप्त होंगे।

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