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जवान विधवा के चक्कर में चार बुड्ढों ने किया पांचवें का कत्ल

Nalanda(BIHAR) Latest News

बिहार के समाज में जब कोई स्त्री विधवा हो जाती है तो लोग उसके प्रति एक अलग ही भाव रखते हैं. उसे लाचार, मजबूर और हमदर्दी के योग्य मानते हैं. लेकिन, अगर कोई जवान महिला विधवा हो जाए और उसकी रंगरेलियों की कहानी आप तक पहुंचे तो आप क्या सोचेंगे? आज हम जो आपको कहानी सुनाने जा रहे हैं, वह बिहार के मुख्यमंत्री के गृह जिले की है.

किस्सा ये है कि एक 30 साल की औरत विधवा हो जाती है. उसके पति की कोरोना में मौत हो गई. कोई बाल-बच्चा नहीं. देखने में ठीक-ठाक. सवाल ये आया कि अगर कुछ किया न जाए तो दो वक्त की रोटी कहां से मिलेगी. तो, यह तय किया गया कि चाय की एक दुकान लगाई जाए. उसमें नमकीन भी रखी जाए. विधवा ने चाय की दुकान खोल ली. नमकीन भी रखने लगी. ग्राहक आने लगे. दुकान धीरे-धीरे चलने लगी. रोज इतनी आमदनी हो जाती थी कि विधवा का गुजारा होने लगा.

विधवा पर नखरेबाज

वह थी तो विधवा पर नखरेबाज भी कम नहीं थी. दुकान पर बैठती थी तो सज-धज कर. ऐसा गांव वाले बताते हैं. तो, जब दुकान पर सद-धज कर बैठती थी तो जाहिर है, गुड़ के पास चींटियां तो आएंगी ही. चार बूढ़े उसकी दुकान पर चाय पीने आने लगे. रोज आते, चाय पीते, चले जाते. ये वो बूढ़े थे जो रंडुआ (विधुर) हो चुके थे. यह अजब इत्तेफाक था कि चारों बुड्ढे उस विधवा पर जान छिड़कने लगे. उनमें एक की आयु 62, दूसरे की 65, तीसरे की 70 और चौथे की 66 साल की थी. नाम किसी का पता नहीं चल सका है.

इजहार ए ईश्क

चारों बुड्ढों की जिंदगी में वीरानगी थी. विधवा भी अकेली थी. एक दिन चारों बुड्ढों ने एक ही साथ अपने मन की बात विधवा से कह डाली. विधवा को कोई आपत्ति नहीं हुई. आपत्ति इसलिए नहीं हुई क्योंकि वह भी अकेलेपन से ऊब चुकी थी. उसने चारों के प्रेम को स्वीकार कर लिया.

घर आना-जाना चालू

जब विधवा ने चारों विधुरों के प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो वे उनके घर भी आने-जाने लगे. घर पर जाते थे तो घंटों घर का दरवाजा बंद रखते थे. अब बंद घर में क्या होता था, यह आप दिमाग लगाईए.

पांचवे बुड्ढे की एंट्री

चारों बुड्ढों और विधवा की जिंदगी अब खुशनुमा हो रही थी. वे पहले ही तरह अब मुंह लटका कर बैठे नहीं रहते थे. चारों का उस विधवा पर अधिकार जैसा हो गया था. वे चाय तो पीते ही थे, देश-दुनिया की बात भी करते थे. मजाक भी होता था. होली और फगुआ भी गाते थे. विधवा भी कभी-कभी गाती थी. चारों बुड्ढे उसके गाने पर वाह-वाह करते थे. तभी एक पांचवा बुड्ढा भी चाय पीने उस विधवा की दुकान पर आने लगा. यह बुड्ढा 75 साल का था. वहीं, लोकल का ही था. विधुर. पांचवे बुड्ढे से न तो विधवा को कोई आपत्ति थी, न ही चारों बुड्ढों को. एक दिन हिम्मत करके पांचवा बुड्ढा भी विधवा के घर पर पहुंच गया. उसे देख कर चारों बुड्ढों को खराब लगा. लेकिन, विधवा ने उन्हें समझा दिया. लेकिन, चारों बुड्ढों को पांचवे की यह एंट्री पसंद नहीं थी. बाद में विधवा को भी पांचवे बुड्ढे की एंट्री खलने लगी. वह जरूरत से ज्यादा ही डिमांडिंग निकला.

साजिश की, निपटा दिया

पांचवे बुड्ढे के आने से पहले वाले चारों बुड्ढे फिर से तनाव में रहने लगे. कारण यह था कि विधवा अब बुड्ढे को सचमुच चाहने लगी थी. वह पांमचवे बुड्ढे की फरमाइश पूरे करने लगी थी. चारों की फरमाइशों को अब उसने बंद कर दिया था. लेकिन, चारों बुड्ढों ने घर पर आना बंद नहीं किया था. वे विधवा से अपनी दिल्लगी बढ़ाते ही जा रहे थे.

अकेले में बुलाया

एक दिन चारों ने मिल कर कुछ तय किया. विधवा से कहा कि पांचवा बुड्ढा आए तो उसे फलानी जगह पर भेज देना. विधवा के प्रेम में बुरी तरह पागल पांचवे बुड्ढे को विधवा ने जैसे ही कहा कि जरा वहां चले जाईए, बुड्ढा फौरन चला गया. जिस गली में बुड्ढे को बुलाया गया था, वहां पहले से ही चारों बुड्ढे तैयार खड़े थे. चारों बुड्ढों ने कहा कि तुम विधवा के घर आना-जाना बंद कर दो. वह हम लोगों की हो चुकी है. पांचवे बुड्ढे ने कहा कि हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं. इस पर चारों बुड्ढे ने पहले तो धमकाया, फिर हातापाई की नौबत आ गई. एक बुड्ढे ने पांचवे बुड्ढे के सिर पर ईंट से घतनी बार वार किया कि जब तक वह मर नहीं गया, तब तक उस पर ईंट का प्रहार करते रहे. जब पांचवा बुड्ढा मर गया तो चारों बुड्ढों ने उसके शव को उठाया और अस्थावां पॉलीटेक्निक कॉलेज के नजदीक बनने वाले एक पानी के टंकी में जाकर डाल दिया.

खोजबीन चालू

पांचवा बुड्ढा जब 21 अक्टूबर तक अपने घर नहीं पहुंचा तो उसके परिजनों को चिंता हुई. पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई. पुलिस ने बहुत मुश्किल से उसके शव को पानी की टंकी से बरामद किया. वह शव भी इसलिए बरामद हो सका, क्योंकि लाश से बदबू आ रही थी. बदबू के सहारे ही पुलिस शव तक पहुंची. अब शव तो मिल गया लेकिन शक करें तो किस पर. किसी पर शक था नहीं. लिहाजा, मामला आया-गया हो गया.

मोबाइल की तलाश

पांचवे बुड्ढे के परिजनों ने एक चीज नोटिस की. बुड्ढा जब 19 अक्टूबर को घर से निकला था, तब उसके हाथ में मोबाइल था. जब उसकी डेड बॉडी मिली तो उसके पास मोबाइल नहीं था. इस बात की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस ने उस नंबर को सर्विंलांस पर लगा दिया.

विधवा ने रखा था मोबाइल विधवा ने पांचवे बुड्ढे का मोबाइल अपने पास ही रख लिया था. वह पहले भी पांचवे बुड्ढे से कई चीजें लेकर रख ली थीं. इस घटना को जब एक माह से ज्यादा हो गया, चारों बुड्ढों और विधवा को जब यह एहसास हो गया कि अब मर्डर का मामला दब गया है तो एक दिन उसने पांचवे बुड्ढे के मोबाइल को स्विच ऑन कर दिया. चूंकि नंबर सर्विंलांस पर लगा था. लिहाजा, जैसे ही मोबाइल फोन स्विच ऑन हुआ, पुलिस को मोबाइल की लोकेशन का पता चला गया. पुलिस फौरन चाय की दुकान पर पहुंची. थोड़ी सख्ती दिखाते ही विधवा टूट गई. उसने अपना गुनाह तो कुबूल किया ही, चारों बुड्ढों को बारे में भी पुलिस को बता दिया. अब पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर रिमांड पर ले लिया है और जरूरी पूछताछ की जा रही है. उम्मीद है कि पांचों की शेष जिंदगी जेल में ही बीतेगी.

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