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Health is Wealth : पहले संवारिए हेल्थ, फिर देखिए वेल्थ, नहीं तो न जाने कब यमराज के बुलावे पर…

English (अंग्रेजी) की कहावत (Proverb) हेल्थ इज वेल्थ एक कहावत ही नहीं है, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है। जीवन किसी के हाथ में नहीं है, मगर खुद सेहत के प्रति सजग और सतर्क रहकर हम जीवन को संवार सकते हैं। हेल्थ को सवारे बिना जीवन को संवारना संभव नहीं है। आइए,  इससे मुतल्लिक जानते हैं एक कहानी।

मेहनत खूब, सेहत उपेक्षित

एक बार की बात है, एक बड़े से शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत पैसा था और उसने कुछ दिनों पहले ही शहर में एक बहुत बड़ा घर भी खरीदा था। वह आदमी पैसों से तो बहुत धनी था, लेकिन उसका शरीर और उसकी सेहत बहुत ही गरीब थी। उसका स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता था।

वह दिन-रात पैसे कमाने के लिए बहुत मेहनत करता था, लेकिन अपने शरीर के लिए उसके पास बिलकुल भी वक्त नहीं था। यहां तक कि वह सुबह-सुबह सैर के लिए भी नहीं जाता था।

कई बीमारियों ने घेरा

बहुत अमीर होने और पैसे कमाने के बाद भी उसे कई नयी-नयी बीमारियों ने घेर लिया था।

वह आदमी स्वार्थी नहीं था, पर सिर्फ इतना था कि उस आदमी के पास पैसा खर्च करने का समय नहीं था। उसे पैसे कमाने की आदत थी। यहां तक कि डॉक्टर के पास जाने के लिए भी उसके पास वक्त नहीं था। ध्यान न देने के कारण उसका शरीर धीरे-धीरे कमज़ोर होता जा रहा था। एक दिन वह बहुत थक कर घर आया और तो और उसको बहुत बुरा सिरदर्द भी हो रहा था, इसलिए वह सीधा जाकर अपने बिस्तर पे लेट गया।

थका होने के कारण भूखा ही सो गया

जब उसका नौकर उसके लिए खाना लाया तब बहुत थकने के कारण उसने खाना खाने से मना कर दिया और भूखा ही सो गया। आधी रात को उसका सिरदर्द और भी बढ़ गया। उसको कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है। तभी अचानक से उसके सामने एक अजीब सी आकृति आकर खड़ी हो गई और वह बोली, “मैं तुम्हारी आत्मा हूं और आज से मैं तुम्हारे शरीर को हमेशा के लिए छोड़ रही हूं।” तब वह आदमी घबरा कर बोला, “तुम मेरे शरीर को क्यों छोड़ रही हो? मेरे पास बहुत पैसा है और मैंने इसके लिए पूरी जिंदगी मेहनत की है। मैं इतना विशाल घर में रहता हूं, कि ऐसे घर को कई लोग सिर्फ अपने सपने में सोच सकते हैं।”

आत्मा ने शरीर में रहने से किया इनकार

इतने पर आत्मा बोली, “मेरी बात ध्यान से सुनो, ये बड़ा घर तुम्हारा घर है, मेरा नहीं। मेरा घर तो तुम्हारा शरीर है, जो दिन पे दिन दुबला होता जा रहा है और तो और कई बीमारियों की चपेट में भी आ गया है। तुम कल्पना करो कि तुम कई वर्षों से टूटी हुई झोपड़ी में रह रहे हो। उसी प्रकार तुमने अपने शरीर यानी मेरे घर की हालत की हुई है और मैं अब इसमें और नहीं रह सकती।” यह सब बातें बोलकर, आत्मा उस आदमी का शरीर छोड़कर चली गई और उस आदमी की मृत्यु हो गई। अब सोचिए यह कहानी हमें क्या शिक्षा देती है।

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