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…तो हार्ट अटैक आने से एक महीने पहले से ही शरीर देने लगता है वार्निंग

…तो हार्ट अटैक आने से एक महीने पहले से ही शरीर देने लगता है वार्निंग

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Health alart, health news, heart attack warning : डाक्टरों की मानें तो हार्ट अटैक एक अचानक घटने वाली घटना है और आज यह मौत की सबसे आम वजह बन चुकी है। डाक्टरों के ही अनुसार ऐसा इसलिए भी होता है कि हममें से अधिकतर लोग हार्ट अटैक के लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं। हाल ही में 500 से अधिक महिलाओं पर हुए एक अध्ययन के अनुसार हार्ट अटैक आने से एक महीने पहले से ही शरीर वार्निंग देने लगता है।

71 प्रतिशत महिलाओं ने की थकान की शिकायत

जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हार्ट अटैक आने से एक महीने पहले से ही इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस रिसर्च में 500 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया था, जो दिल का दौरा पड़ने से बच गई थीं। कुल प्रतिभागियों में से 95 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने देखा कि उनके दिल के दौरे से एक महीने पहले से ही शरीर में कुछ लक्षण दिखाई दे रहें थे। जहां 71 प्रतिशत ने थकान को एक सामान्य लक्षण बताया, वहीं 48 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें नींद से संबंधित समस्याएं हुई। कुछ महिलाओं ने सीने में दर्द भी, छाती में दबाव, दर्द या जकड़न का अनुभव करने की भी बात कहीं।

अगर ऐसा लगे तो हो जाएं सचेत, इनसे बचें

क्या आप खुद को थका-थका सा महसूस करते हैं, नींद लेने में दिक्कत हो रही है, खट्टी डकार आती है, चिंता से पीड़ित हैं, दिल की धड़कन तेज हो जा रही है, हाथ में कमजोरी/भारी का अनुभव कर रहे हैं, सोच या याददाश्त में बदलाव तो नहीं दिख रहा, दृष्टि में बदलाव तो नहीं आ रहा, भूख कम लग रही है, पैर में झुनझुनी है, रात में सांस लेने में कठिनाई हो रही है, अगर ऐसा है तो सचेत हो जाएं और तत्काल डॉक्टर के पास जाएं। ये लक्षण हार्ट अटैक के हो सकते हैं। अगर हार्ट अटैक से बचना है तो मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन, हाई फैट डाइट से बचें।

बचने की संभावना को दोगुना कर जाता है सीपीआर

अगर आप में दिल के दौरे के लक्षण विकसित होते हैं तो तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए अपने नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को अचानक दिल का दौरा पड़ता है और उसे सांस लेने में कठिनाई होती है तो शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाए रखने या बहाल करने के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) शुरू करें। एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर कार्डियक अरेस्ट के पहले कुछ मिनटों में सीपीआर किया जाए तो यह किसी व्यक्ति के बचने की संभावना को दोगुना कर सकता है।

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