Jharkhand : शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन के पटल पर पेश हुआ द्वितीय अनुपूरक बजट, हुआ पारित, खूब हुई नोक-झोंक, दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बरसे

Jharkhand latest Hindi news : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बुधवार को द्वितीय अनुपूरक बजट पर चर्चा हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। दोनों एक-दूसरे पर जम कर बरसे। अनुपूरक बजट के समर्थन में प्रदीप यादव ने एक नारा दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के तीन सिपाही, आईटी, ईडी और सीबीआई। ये लोग देश भर में विपक्ष की सरकारों को अपने सिपाहियों से परेशान कर रहे हैं। इसके बावजूद तमाम परेशानियों को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार अपना काम पूरा करेगी।

प्रदीप यादव ने कहा कि राज्य के युवाओं का भविष्य भाजपा ने ही बर्बाद किया है। 20 वर्षों से इन्हीं का शासन रहा है। युवाओं को ये लोग दिग्भ्रमित कर रहे हैं। अगर ये लोग झारखंड का हित चाहते हैं, तो केन्द्र में इनकी सरकार है। केन्द्र के पास जाकर झारखंड के हितों की रक्षा की वकालत करें। नौंवी अनुसूची में शामिल होने से 1932 आधारित स्थानीयता और आरक्षण नीति को सुरक्षा कवच मिलेगा।

मैं चुप रहनेवाला नहीं : सीपी सिंह

भोजनावकाश के बाद द्वितीय अनुपूरक पर चर्चा के दौरान कटौती के समर्थन में बोलते हुए भाजपा विधायक सीपी सिंह ने कहा, ‘सदन में सवाल डालने के बाद से ही कई लोगों का फोन आना शुरू हो जाता है। कई लोग ऐसे हैं, जो फोन आने के बाद सदन से अनुपस्थित हो जाते हैं। लेकिन, मैं जब सवाल डालता हूं, तो पूछता भी हूं। मैं चुप रहनेवाला नहीं हूं।’
उन्होंने कहा कि जब मूल बजट का 40 फीसदी पैसा ही खर्च हुआ है, तो अनुपूरक बजट का कोई औचित्य नहीं है। सीपी सिंह ने कहा कि बोरियो में हुई घटना दुखद है। लेकिन, हकीकत यह है कि हेमन्त सोरेन की सरकार बनने के बाद ही महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ गयी है। अब तक 4800 रेप केस के मामले सामने आये हैं, जो भयावह है। सीपी सिंह ने कहा कि खाद्य उपभोक्ता एवं वितरण विभाग ने गरीबों का चार महीने का राशन ही बेच दिया। विभाग के एमडी की मिलीभगत से यह सब हो रहा है। करोड़ों रुपये लेकर भ्रष्ट और नामजद ठेकेदारों को काम दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक कमेटी बना कर इसकी जांच होनी चाहिए।
भाजपा नहीं चाहती कि झारखंड के युवाओं को नौकरी मिले : सुदिव्य सोनू

अनुपूरक बजट के पक्ष में बोलते हुए झामुमो विधायक

सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि नियोजन नीति पर हाई कोर्ट की टिप्पणी पर मैं कुछ नहीं कहता, लेकिन इस निर्णय से झारखंड में सात लाख बच्चों के घरों में मातम पसरा हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग नहीं चाहते कि झारखंड के युवाओं को नौकरी मिले, इसलिए झारखंड के बाहर के लोगों से कोर्ट में पीटिशन दायर किया गया। उन्होंने कहा कि नियोजन नीति के खिलाफ 20 लोग हाई कोर्ट गये थे, जिसमें मात्र एक झारखंड का है, वह भी भाजपा के हैं। यही वजह है कि भाजपा के लोग इस कोर्ट से इस नीति के खारिज हो जाने के बाद खुश हैं। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी की सरकार में स्थानीय नीति बनी, ओबीसी का आरक्षण बढ़ाया गया, हाई कोर्ट ने खारिज किया, तो वे लोग सुप्रीम कोर्ट नहीं गये। यह भाजपा की मंशा को दर्शाता है।

झारखंड में कौन-सी नियोजन नीति लागू है : भानु प्रताप शाही

भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने नियोजन नीति पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार की उर्दू को ‘आई लव यू’ की नीति को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। सरकार की नीति भेदभावपूर्ण, त्रुटिपूर्ण और तुष्टीकरण की राजनीति से प्रभावित थी। इसलिए हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि आज झारखंड में कौन-सी नियोजन नीति लागू है। सरकार की गलत नीतियों से गुस्साये राज्य के युवा मौके के इंतजार में हैं।उन्होंने कहा कि 1932 खतियान और नियोजन नीति पर विधि विभाग की प्रतिकूल टिप्पणी के बाद असंवैधानिक तरीके से फैसला लिया, जिस कारण राज्य के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। हर वर्ष पांच लाख नियुक्ति का वादा कर सरकार में आयी यह सरकार तीन वर्ष में मात्र 356 नियुक्ति ही कर पायी है। बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि खतियान आधारित नियोजन नीति कोर्ट में खारिज हो जायेगी। जब ईडी ने माइंस लीज में उन पर नकेल कसी, तो 1932 याद आ गया। उन्होंने कहा कि यह झारखंड किसी की खैरात नहीं है, बल्कि यहां की साढ़े तीन करोड़ जनता का है।
इनसेट

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