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🗓️ Fri, Apr 4, 2025 🕒 9:38 AM

भारत योग और आयुर्वेद की भूमि है – डॉ अशोक वार्ष्णेय

भारत योग और आयुर्वेद की भूमि है – डॉ अशोक वार्ष्णेय

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▪︎ शरीर रोग का घर है यह आयुर्वेद कहता है, इसे हमेशा साफ करते रहना चाहिए – स्वामी मुक्तरथ

Ranchi News : सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र,बसंत बिहार कॉलोनी, काँके रोड में ‘स्वस्थ जीवनशैली एवं स्वास्थ्य की चुनौतियाँ‘ विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया । इसके मुख्य वक्ता आरोग्य भारती के राष्ट्रीय प्रमुख एवं आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सलाहकार समिति सदस्य डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय थे। इस अवसर पर राँची महानगर के प्रबुद्धजन डॉक्टर,वकील, शिक्षक, व्यवसायी वर्ग,कार्पोरेट्स से संबद्ध,विद्यार्थी एवं योग शिक्षक समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। योग केंद्र में मुख्य अतिथि डॉ अशोक वार्ष्णेय जी का स्वागत स्वामी मुक्तरथ एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट विनोद गढ़ियान पुष्प गुच्छ एवं शॉल भेंट कर किया। श्रुति कीर्ति द्वारा मुख्य अतिथि को तिलक एवं पुष्प से सम्मानित किया गया।

किसी भी पैथी के साथ योग के जुड़ने से शरीर से रोगों को बाहर निकलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है: वार्ष्णेय
डॉ वार्ष्णेय ने अपने उद्बोधन के पूर्व लोगोँ की जीवनचर्या से संबंधित कुछ बातों की जानकारी लिया। मसलन लोग प्रातः सूर्योदय से पूर्व जागते हैं, कितने लोग बच्चों को तैयार करने हेतू एक घण्टे पूर्व उठ जाते हैं, कितने लोग रात्रि को सोने के दो घण्टे पूर्व भोजन कर लेते हैं, कितने लोग योग और ध्यान करते हैं और कितने लोग शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम करते हैं। उन्होंने कहा कि ये जीवन की बहुत महत्वपूर्ण बातें हैं क्योंकि शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारक यही सब है, आपकी अनियमित जीवन चर्या । उन्होंने कहा कि शरीर अस्वस्थ होने का मुख्य कारण तनाव, चिंता, और अनियमित जीवनशैली है इसे ठीक किये बगैर स्वस्स्थ होने की कामना निराधार है। आयुर्वेद कहता है शरीर रोग का घर है इसे हर दिन साफ करने की जरूरत है, शरीर की सफाई और मानसिक सफाई । उन्होंने कहा कि किसी भी पैथी के साथ जब योग जुड़ जाता है तो शरीर से रोगों को बाहर निकलने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और शरीर का ऑभरवायलिंग हो जाता है ।

ऋतु और मौसम के अनुसार धरती जो पैदा करती है वही ग्रहण करना चाहिए

उन्होंने कहा कि ऋतु और मौसम के अनुसार धरती जो पैदा करती है वही ग्रहण करना चाहिए। साथ ही श्री वार्ष्णेय ने कहा कि वायुमंडल के मुताबिक पृथ्वी औषधीय पौधों को भी जन्म देती है जो जिस प्रान्त में हैं वहाँ वैसी वनौषधियां विद्यमान हैं । मनुष्य को उसके तरफ कदम बढ़ाने की जरूरत है।
योगाचार्य स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि शरीर रोग का घर है यह आयुर्वेद कहता है, इसे हमेशा साफ करते रहना चाहिए । उन्होंने कहा कि हमारे इस योग केन्द्र में आध्यात्मिक स्वास्थ्य को दृष्टिकोण में रखकर साधकों एवं विद्यार्थियों को योग साधना की शिक्षा दी जाती है। यहाँ ध्यान, षट्कर्म,योगासन और मंत्र साधना की सभी क्रियायों को बताया जाता है।

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