Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:


Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:

☀️
–°C
Fetching location…

बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया नहीं रहीं: सैन्य प्रमुख की पत्नी से प्रधानमंत्री बनने तक की पूरी कहानी

बांग्लादेश की पूर्व PM खालिदा जिया नहीं रहीं: सैन्य प्रमुख की पत्नी से प्रधानमंत्री बनने तक की पूरी कहानी

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया के निधन के बाद देश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। खालिदा जिया सिर्फ एक राजनेता नहीं थीं, बल्कि वह बांग्लादेश की सत्ता, संघर्ष और लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक रहीं। उनके निधन के बाद यह सवाल अहम हो गया है कि बांग्लादेश उन्हें किस रूप में याद करेगा।

सेना प्रमुख की पत्नी से सत्ता तक का सफर

खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन साधारण नहीं रहा। वह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान की पत्नी थीं। जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया राजनीति में सक्रिय हुईं और धीरे-धीरे BNP की कमान संभाली। 1991 में वह पहली बार प्रधानमंत्री बनीं और बांग्लादेश की लोकतांत्रिक राजनीति में एक मजबूत महिला नेतृत्व के रूप में उभरीं।

लोकतंत्र की बहाली की प्रतीक

खालिदा जिया को बांग्लादेश में सैन्य शासन के बाद लोकतंत्र की बहाली की एक प्रमुख आवाज के रूप में याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में 1990 के दशक में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिशें हुईं। समर्थक उन्हें ऐसी नेता मानते हैं जिन्होंने सत्ता के लिए संघर्ष किया, लेकिन चुनावी राजनीति और संसद की भूमिका को हमेशा अहम माना।

दो बार प्रधानमंत्री, मजबूत विपक्षी नेता

खालिदा जिया दो बार प्रधानमंत्री रहीं, 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक। उनके कार्यकाल में आर्थिक सुधार, निजीकरण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए। सत्ता से बाहर रहने के दौरान भी वह एक सशक्त विपक्षी नेता बनी रहीं और शेख हसीना की सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में जानी गईं।

विवाद, मुकदमे और संघर्ष

खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। उनके कार्यकाल और बाद के वर्षों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनके समर्थकों का मानना है कि ये मामले राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा थे, जबकि आलोचक इसे उनके शासन की कमजोरी बताते हैं। बीमारी और लंबे समय तक जेल में रहने ने उनके अंतिम वर्षों को बेहद कठिन बना दिया।

‘बेगम राजनीति’ का अहम चेहरा

बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया और शेख हसीना की प्रतिद्वंद्विता को ‘बेगम राजनीति’ के नाम से जाना जाता है। दशकों तक इन दोनों नेताओं के बीच सत्ता की लड़ाई ने देश की राजनीति की दिशा तय की। खालिदा जिया को इस दौर की एक केंद्रीय शख्सियत के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

जनता की स्मृति में खालिदा जिया

बांग्लादेश में खालिदा जिया की छवि भी दो हिस्सों में बंटी रही। समर्थकों के लिए वह साहसी, संघर्षशील और लोकतांत्रिक नेता थीं, जबकि आलोचकों के लिए उनका शासन विवादों और अस्थिरता से जुड़ा रहा।

इसके बावजूद, यह तय है कि बांग्लादेश की राजनीति के इतिहास में उनका नाम एक मजबूत महिला नेता और सत्ता के खिलाफ डटकर खड़ी होने वाली शख्सियत के रूप में दर्ज रहेगा। खालिदा जिया का निधन भले ही एक राजनीतिक अध्याय का अंत हो, लेकिन उनकी विरासत बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।

Share this:

Latest Updates