ज्येष्ठ माह में नियमित करें सूर्य देव और वरुण देव की उपासना, मिलेगा खास फल

तपती धूप जीत के महीने की पहचान होती है यह महीना सूर्य देव और वरुण देव दोनों की दृष्टि से मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि इस मास में सूर्यदेव और वरुणदेव की उपासना विशेष फलदायी है। इस माह में जल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस माह तिल का दान करने से भगवान श्री हरि विष्णु प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। 

पौधों में अवश्य जल देना चाहिए

इस माह प्रातः और सायं को पौधों में जल अवश्य दें। प्यासों को पानी पिलाएं। घड़े सहित जल और पंखों का दान करें। ज्येष्ठ माह के हर रविवार उपवास रखें। ज्येष्ठ माह के स्वामी मंगलदेव हैं। इस माह हर मंगलवार को हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड का पाठ अत्यंत फलदायी है। ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार बड़े मंगलवार कहलाते हैं। इस माह प्रत्येक मंगलवार व्रत रखकर संकटमोचन हनुमान जी की​ विधि विधान से पूजा करें। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीराम से हनुमान जी का मिलन इसी दिन हुआ था। 

इसी दिन हनुमान जी ने भीम के अभिमान को तोड़ा था

एक अन्य कथा के अनुसार महाभारत काल में जब भीम को अपने बल का अभिमान हो गया तो हनुमान जी ने बूढ़े वानर का रूप रखकर उनके अभिमान को इसी दिन तोड़ा था। इसलिए ज्येष्ठ मास के मंगलवार को बड़ा मंगल नाम से जाना जाता है। इस माह शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, निर्जला एकादशी, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत, गंगा दशहरा जैसे कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं। इस माह में ऐसी वस्तुओं का दान करें जो ठंडक और छाया देने वाली हैं। ज्येष्ठ माह में गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

सत्यनारायण की कथा का करें श्रवण

 ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन किया जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। ज्येष्ठ पूर्णमा के दिन संत कबीरदास का जन्म दिवस भी मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह में दिन में नहीं सोना चाहिए, जहां तक संभव हो दिन में एक बार ही अन्न ग्रहण करना चाहिए।

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