Sikkim Accident: एक दिन पहले हुए सिक्किम हादसे में बिहार का लाल भी हुआ था शहीद, आरा निवासी थे प्रमोद, पैतृक गांव बामपाली में शोक की लहर

Sikkim Army Truck Accident : सिक्किम में एक दिन पहले हुए सड़क दुर्घटना में सेना के 16 जवानों की मौत हो गई थी। इस हादसे में बिहार के लाल प्रमोद कुमार सिंह भी शहीद हो गए थे। प्रमोद आरा जिला अंतर्गत उदवंतनगर थाना के बामपाली गांव के रहने वाले थे। जैसे ही उनके शहीद होने की खबर गांव में मिली। गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई यह खबर सुनकर शोक में डूब गया। सहसा पहली बार में किसी गांव वाले को यह यकीन हो नहीं रहा था कि अब हमारे बीच हमारा लाल प्रमोद नहीं है। उधर गांव में प्रमोद के परिजन इस घटना से बेहद आहत हैं। परिवार वालों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। घर की महिलाओं के करुण क्रंदन से वातावरण शोक पूर्ण हो गया है। 

सूचना मिलते ही बेसुध होकर गिर पड़ीं शहीद की मां

हालांकि शहीद जवान के पिता और मां को बहुत देर बाद बेटे के शहीद होने की जानकारी दी गई। हालांकि घरवालों के रोने बिलखने से दोनों को किसी अनिष्ट खबर की शंका तो जरूर हो रही थी। पर उन्हें यह नहीं मालूम था कि लोग उनके पुत्र के शहीद होने के कारण है ही बिलख रहे हैं। जब मामले की जानकारी शहीद की मां को हुई तो वह रोते-रोते बेहोश होकर गिर पड़ी। पिता भी एक कोने में शांत होकर आंसू बहा रहे थे। वे इस सूचना से इतना ज्यादा आहत थे कि वह कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे। शहीद बेटे के माता-पिता की हालत रो-रो कर बहुत खराब हो चुकी है। गांव के लोग उन्हें बार-बार सांत्वना दे रहे हैं लेकिन दोनों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है।

देहरादून से गांव पहुंच रही शहीद की पत्नी और बच्चे

शहीद जवान के बड़े भाई और वामपाली पंचायत के पूर्व उपमुखिया अजय सिंह ने बताऊ कि उन्हें अपने भाई के शहीद होने की खबर शुक्रवार शाम को ही मिली थी। लेकिन उन्होंने कुछ ही लोगों को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि छोटा भाई प्रमोद सिंह देहरादून में ही अपनी पति पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। उसके शहीद होने की सूचना उसकी पत्नी को दे दी गई है। वह शनिवार की देर शाम तक बच्चों के साथ गांव पहुंच जाएगी। इसके बाद आगे का कार्यक्रम होगा।

दानापुर में 2011 में हुए थे सेना में भर्ती

शहीद जवान प्रमोद सिंह के बड़े भाई अजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में दानापुर में सेना में उनका भाई भर्ती हुआ था। वह सिक्किम में 221 फील्ड रेजिमेंट में आर्टिलरी कोर में नायक के पद पर पदस्थापित था। उन्होंने बताया कि प्रमोद  दो महीनों की छुट्टी लेकर गांव आये थे और 20 दिनों पहले ही वो गांव में छुट्टी बिताने के बाद सिक्किम लौट गए थे। प्रमोद दो भाई और दो बहनों में सबसे छोटे थे। वह अच्छे स्वभाव और व्यवहार के धनी थे। 

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