कल है महेश नवमी, जानिए जेठ माह में भगवान शिव और पार्वती की पूजा करने से क्यों मिलता है महापुण्य

ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन महेश नवमी मनाते हैं। माना जाता है कि इस दिन ही माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए माहेश्वरी समाज द्वारा यह पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार ये व्रत 8 जून को रहेगा। ज्येष्ठ महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से हर तरह के पाप दूर हो जाते हैं। इसलिए महेश नवमी पर व्रत और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।

इस तरह करें पूजा

1. सुबह जल्दी उठकर नहाएं और व्रत का संकल्प लें। उत्तर दिशा की ओर मुंहकर के भगवान शिव की पूजा करें।

2. गंध, फूल और बिल्वपत्र से भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें। दूध और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

3. शिवलिंग पर बिल्वपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। इस तरह पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।

महेश नवमी मनाने का कारण

महेश नवमी पर खासतौर से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। किसी कारण से उन्हें ऋषियों ने श्राप दे दिया। तब इसी दिन भगवान शंकर ने उन्हें श्राप से मुक्त किया व अपना नाम भी दिया। यह भी प्रचलित है कि भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य या व्यापारिक कार्य को अपनाया।

ज्येष्ठ में शिव पूजा का महत्व

ज्येष्ठ महीने में भगवान शिव की पूजा का विधान ग्रंथों में बताया है। इन दिनों में भगवान शिव को खासतौर से जल चढ़ाया जाता है। मंदिरों में शिवलिंग को पानी से भरा जाता है। ज्येष्ठ महीने में भगवान शिव को गंगाजल और सामान्य जल के साथ दूध भी चढ़ाया जाता है। स्कंद और शिव पुराण के मुताबिक इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से महापुण्य मिलता है।

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