▪︎ सात साल तक बेटे की तरह रखा था एक परिवार
Giridih News: मानसिक अस्थिरता के कारण घर से भटककर निकले युवक सुनील कुमार का सात साल बाद अपने परिवार से पुनर्मिलन हुआ है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के बदलापुर अंतर्गत उदयपुर गांव के निवासी सुनील ने शनिवार को अपने चाचा छोटेलाल वर्मा, राज वर्मा और आशीष वर्मा से बगोदर के दोंदलो गांव में मुलाकात की। वर्षों तक अपने बेटे के समान देखभाल करने वाले सरयू साव ने गांव के मुखिया तुलसी महतो की उपस्थिति में सुनील को उसके स्वजन को सौंपा।
मानसिक रूप से बीमार युवक भटकते हुए दोंदलो गांव पहुंचा था
जानकारी के अनुसार करीब सात साल पहले, सुनील मानसिक स्थिति ठीक न रहने के कारण घर से निकल पड़ा और भटकते हुए दोंदलो गांव पहुंचा। गांव के मंदिर के पास लोगों ने उसे चोर समझकर पिटाई शुरू कर दी। तभी सरयू साव की नजर उस पर पड़ी। सुनील ने उनसे गुहार लगाई कि किसी तरह उसकी जान बचा लें। सरयू साव ने न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि उसे अपने घर ले जाकर इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाई। उन्होंने सात वर्षों तक सुनील को बेटे की तरह रखा और उसकी हर जरूरत का ख्याल रखा। इस बीच, गांव में चर्चा के दौरान पता चला कि उत्तर प्रदेश का एक शिक्षक दोंदलो हाई स्कूल में कार्यरत है। उनसे संपर्क कर जानकारी साझा की गई। शिक्षक ने सुनील से बातचीत की और उसके परिवार तक खबर पहुंचाई। शनिवार को जब चाचा छोटेलाल, राज और आशीष वर्मा दोंदलो पहुंचे, तो सभी की आंखें भर आईं। सुनील के चेहरे पर सात साल की दूरी के बाद सुकून और मुस्कान साफ झलक रही थी। गांव के लोग सरयू साव की दरियादिली और मानवता की मिसाल के लिए उनकी सराहना कर रहे हैं। मुखिया तुलसी महतो ने भी सरयू साव की भूमिका की प्रशंसा की।



