Mumbai news : झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) के चुनाव में बरती गई अनियमितता और नियम उल्लंघन को लेकर बीसीसीआई ने सख्त रूप अपनाते हुए जेएससीए को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। बीसीसीआई के इस नोटिस से जेएससीए के पदाधिकारी सकते में है। बता दें कि बीसीसीआई के ओम्बुड्समैन- सह-एथिक्स अधिकारी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा ने जेएससीए को यह शोकॉज नोटिस जारी किया है।
यह कार्रवाई JSCA सदस्य द्वारा दायर शिकायत के आधार पर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि जेएससीए ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किए गए लोढ़ा समिति सुधारों का उल्लंघन किया है, जैसा कि बीसीसीआई ने बिहार के मामले में तय किया है।
जेएससीए पर लगाए गए मुख्य आरोप
1.JSCA ने वर्ष 2018 से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अपने संविधान में संशोधन और पंजीकरण नहीं किया है।
2.सितंबर 2018 में केवल एक विशेष आम बैठक (SGM) हुई थी इसके बाद कोई अनुपालन कदम नहीं उठाया गया, जिसमें 2022 के संशोधन भी शामिल हैं।
3.संशोधित संविधान अभी तक निबंधक के समक्ष अपंजीकृत है। इसके बावजूद JSCA ने 2019, 2022 और 2025 में चुनाव कराए, जो अवैध और अपंजीकृत ढांचे के अंतर्गत हुए।
जेएससीए चनावों पर प्रश्नचिह्न
शिकायत के अनुसार, अपंजीकृत संविधान के तहत हुए चुनाव असंवैधानिक हैं। कानूनी रूप से शून्य (Void) हैं
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सीधा उल्लंघन हैं।
ओम्बुड्समैन के नोटिस में भी यह दर्ज है कि जेएससीए चुनाव संविधान के पंजीकरण के बिना कराए गए।
वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया
शिकायत में JSCA द्वारा BCCI से प्राप्त धन के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार वित्तीय सहायता बीसीसीआई के नियमों के अनुपालन पर निर्भर है। लेकिन JSCA ने कथित रूप से बिना आवश्यक सुधार लागू किए ही धन प्राप्त किया और उसका उपयोग किया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Board of Control for Cricket in India v. Cricket Association of Bihar के मामले में (दिनांक 18.07.2016 और 07.10.2016 के आदेशों द्वारा) स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राज्य क्रिकेट संघों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता/अनुदान का वितरण उनके द्वारा लोढ़ा समिति के सुधारों को स्वीकार करने एवं लागू करने पर निर्भर करेगा, और यदि इन सुधारों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी निधियों के वितरण और उपयोग को रोका या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
ओम्बुड्समैन के निर्देश
JSCA को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता को सात दिनों में प्रत्युत्तर (Rejoinder) दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई के बाद इस मामले पर बीसीसीआई अपना रुख तय करेगा।
मामले में क्या हो सकता है संभावित परिणाम
जेएससीए पर यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो JSCA के पूर्व चुनाव रद्द हो सकते हैं। वित्तीय प्रतिबंध या ऑडिट
पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासक की नियुक्ति और जेएससीए चुनाव फिर से हो सकता है।
जेएससीए की बड़ी परीक्षा
यह मामला राज्य क्रिकेट संघों में पारदर्शिता और सुशासन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाता है। इसका परिणाम भारतीय क्रिकेट में सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। अब देखना यह है कि जेएससीए कितनी कुशलता के साथ इस मामले का हल निकलता है।



