सत्र 2025-26 में जेएससीए से बिना रजिस्ट्रेशन करवाये ही आरडीसीए ने आयोजित करवा लिए मैच
Lochan Singh, Ranchi : किसी भी संस्था को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए केवल पद या प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि सूझबूझ, ईमानदारी और निरंतर मेहनत की आवश्यकता होती है। जब संस्था के पदाधिकारी अपने दायित्वों को समझते हुए समर्पण के साथ कार्य करते हैं, तो संस्था प्रगति के पथ पर बढ़ती है। वहीं, दूसरी ओर जब पदाधिकारी संस्था के मूल उद्देश्यों से भटककर उसके बाहरी ग्लैमर, निजी फायदे और दिखावे में उलझ जाते हैं। काम को टालने लग जाते हैं तो ऐसी स्थिति में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन की कमी आने लगती है। इसका सीधा असर संस्था की साख और उसके विकास पर पड़ता है। अगर समय रहते जिम्मेदार लोग अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करते तो संस्था का पतन तय हो जाता है। आज हम बात कर रहे हैं झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) और रांची जिला क्रिकेट एसोसिएशन (आरडीसीए) की।
बिना रजिस्ट्रेशन क्रिकेट सत्र पूरा करने वाला है रांची
अब एक नया मामला आरडीसीए और जेएससीए को लेकर सामने आया है। यह भी बहुत रोचक और हैरान करने वाला है। हुआ यह है कि आरडीसीए ने सत्र 2025- 26 में जेएससीए से पंजीकरण करवाया ही नहीं और अपना क्रिकेट सत्र लगभग पूरा कर लिया है। इसके लिए किसे दोषी माना जाए जेएससीए को या आरडीसीए को। इस मामले के लिए क्रिकेट की दोनों संस्थाएं और इसके पदाधिकारी संयुक्त रूप से दोषी हैं। अगर आरडीसीए ने अपने जिले का जेएससीए से रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया तो जेएससीए ने उसे किस आधार पर जिला लीग करवाने दिया और अंतर जिला क्रिकेट में रांची को खेलाया गया। इस मामले पर यही कहा जा सकता है कि धन्य है जेएससीए, धन्य है आरडीसीए और धन्य हैं इन दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी।
आरडीसीए सचिव पर होनी चाहिए कार्रवाई
जेएससीए से रजिस्ट्रेशन न कराकर आरडीसीए ने जो गलती की है, इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार आरडीसीए के सचिव शैलेंद्र कुमार हैं। क्योंकि जिला इकाई के सचिव के हस्ताक्षर से ही फॉर्म जेएससीए में जमा होता है। इस मामले में आरडीसीए सचिव शैलेंद्र कुमार पर जवाबदेही तय होनी चाहिए
जेएससीए से रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए जिला इकाई को महज देने पड़ते हैं ₹225
जेएससीए से किसी भी जिला संघ को रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए महज 225 रुपए का शुल्क देना पड़ता है। यह शुल्क चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से जमा कराना पड़ता है। इसके अलावा संबंधित जिला से रजिस्टर्ड क्लब, स्कूल अथवा अन्य संस्थान से प्रति यूनिट ₹25 के हिसाब से अलग से राशि जमा करनी पड़ती है। कहने का मतलब यह है कि जिला से यदि 50 स्कूल और क्लब रजिस्टर्ड हैं तो संबंधित जिला इकाई को₹225 जिला का और प्रति यूनिट ₹25 क्लब या स्कूल का शुल्क एक साथ जेएससीए को देना पड़ता है।

जेएससीए आखिर कब करेगा कार्रवाई?
जेएससीए की कार्यप्रणाली, चयन प्रणाली और निजी हित साधने को लेकर अब तक कई खुलासे हो चुके हैं। लेकिन जेएससीए की ओर से अब तक करवाई करने की बात सामने नहीं आई है। ऐसा होना यह दर्शाता है की जेएससीए के पदाधिकारी निर्णय लेने में कितने कमजोर और अक्षम हैं।



