Ranchi news : 10 अगस्त रविवार को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का जन्मदिन रहा। वह 50 वर्ष के हो गये हैं। लेकिन, इस अवसर पर कोई आयोजन नहीं हुआ। कारण रहा मुख्यमंत्री के पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन। मुख्यमंत्री पिता के श्राद्ध कर्म के विधि-विधान और इस अंतराल की प्रक्रियाओं का क्रमवार निर्वहन कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म के छठे दिन अपने परिजनों के संग स्थानीय परम्परागत विधि से हेमन्त सोरेन ने अपने दायित्व का निर्वहन किया। तत्पश्चात उन्होंने नेमरा, रामगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास पर अपने ग्रामीणों एवं परिजनों के साथ श्राद्ध कर्म से सम्बन्धित विचार-विमर्श भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री लगातार भावुक रहे, जो पिता के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। अपने जन्मदिवस पर भावुक मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोशल मीडिया ‘फेसबुक’ और ‘ट्विटर’ पर अत्यन्त हृदयस्पर्शी पोस्ट किया है। उन्होंने कहा है,’आज बाबा बहुत याद आ रहे हैं। मुझे जीवन देनेवाले मेरे जीवनदाता, मेरे जीवन की जड़ें जिनसे जुड़ी हैं, वही मेरे साथ नहीं हैं। बहुत कष्टकारी क्षण है यह। जिनकी मजबूत उंगलियों ने बचपन में मेरे कदमों को थामा, जिनके संघर्ष और लोगों के प्रति जिनके निश्छल प्रेम ने मुझे संवेदनशीलता के साथ जीना सिखाया, हर कठिनाई को सहजता से अवसर में बदलना सिखाया और जब भी राह में अंधेरा हुआ, दीपक बन कर मुझे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया, वह बाबा दिशोम गुरुजी प्रकृति का अंश बन कर सर्वत्र हो गये हैं।’
मुख्यमंत्री कहते हैं, ‘आज बाबा भले ही सशरीर साथ नहीं हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि वह सूरज की हर रोशनी में हैं, हर पेड़ की छाया में हैं, हर बहती हवा में हैं, हर नदी की धार में हैं, हर उस अग्नि की लौ में हैं, जिसमें उन्होंने मुझे सत्य, संघर्ष, कभी न झुक कर, निडर होकर जन-जन की सेवा करने की शिक्षा दी। मेरे बाबा के आदर्श, विचार और शिक्षा की सीख मेरे लिए सिर्फ पुत्र धर्म नहीं, सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने मुझे अपने लोगों से जुड़ना सिखाया, मुझे बताया कि नेतृत्व का अर्थ शासन नहीं, सेवा होता है। आज जब मैं अपने राज्य की जिम्मेदारी उठाता हूं, तो उनकी बातें, उनकी आंखों का विश्वास, उनकी मेहनत और संघर्ष से सना हुआ चेहरा, लोगों की पीड़ा खत्म करनेवाला दृढ़विश्वासी मन, शोषितों-वंचितों और आदिवासी अस्मिता को मुख्यधारा में लाने का संकल्प, मुझे हर निर्णय में मार्गदर्शन देता है।’
हेमन्त सोरेन ने कहा है, ‘बाबा अब प्रकृति में हैं। अब इस मिट्टी में हैं, हवा में हैं, जंगलों में हैं, नदियों में हैं, पहाड़ों में हैं, गीतों में हैं ; उन अनगिनत लोककथाओं की तरह, जो हमेशा अजर-अमर रहती हैं। बाबा, मुझे गर्व है कि मैं आपकी संतान हूं, मुझे मान है कि मैं वीर योद्धा दिशोम गुरुजी का अंश हूं।’
वीर दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें!
जय झारखण्ड!
आज बाबा बहुत याद आ रहे : हेमन्त सोरेन

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