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भाग रहे टीएमसी विधायक को ईडी अधिकारियों ने पकड़ा, मोबाइल नाले में फेंका

भाग रहे टीएमसी विधायक      को ईडी अधिकारियों ने पकड़ा, मोबाइल नाले में फेंका

Kolkata News: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शिक्षक नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार की सुबह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक जीवनकृष्ण साहा के घर पर छापेमारी की है। इस दौरान साहा ने एजेंसी से बचने की कोशिश की और घर के पीछे भागते हुए अपना मोबाइल फोन झाड़ियों के बीच नाले में फेंक दिया। बाद में ईडी अधिकारियों ने नाले से उस मोबाइल को बरामद कर लिया, लेकिन विधायक ने उसका पासवर्ड बताने से इनकार कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने साहा से उनके पिछले 90 दिनों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड को लेकर पूछताछ की, लेकिन उनके जवाबों में कई विरोधाभास मिले। इस कारण एजेंसी ने उनसे लगातार पूछताछ जारी रखी है। बताया गया है कि उन्होंने कम से कम दो मोबाइल फोन का पासवर्ड साझा करने से मना कर दिया है।

सुबह जब ईडी की टीम साहा के मुर्शिदाबाद में अंदि गांव स्थित घर पहुंची, तो विधायक वहीं मौजूद थे। अधिकारियों को देखते ही वह घर के पिछले दरवाजे से भागने लगे। हालांकि, केन्द्रीय बलों के जवानों ने उन्हें पकड़ कर वापस घर के अंदर लाया। इसी दौरान उन्होंने फोन झाड़ियों में फेंक दिया, जो बाद में नाले से बरामद हुआ। अब उसकी तकनीकी जांच की जा रही है कि उसमें क्या अहम जानकारी मौजूद थी।
ईडी ने टीएमसी विधायक के ड्राइवर राजेश घोष से भी पूछताछ की और उनके घर की तलाशी ली।

इसके अलावा, बीरभूम जिले के सांतिया में साहा की बुआ एवं वार्ड नंबर 09 की टीएमसी काउंसिलर माया साहा के घर तथा रघुनाथगंज में उनके ससुराल में भी छापेमारी की गयी। साथ ही, महिषग्राम निवासी एक बैंक अधिकारी राजेश घोष के घर पर भी ईडी की टीम ने तलाशी ली।

यह पहला मौका नहीं है जब विधायक ने सबूत मिटाने की कोशिश की हो। अप्रैल, 2023 में भी जब सीबीआई ने उनके घर पर छापेमारी की थी, तब उन्होंने अपने दो मोबाइल फोन एक तालाब में फेंक दिये थे। घंटों मशक्कत के बाद उन मोबाइलों को तालाब से निकाला गया था। इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और करीब 13 महीने जेल में रहने के बाद उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी।

ईडी की यह कार्रवाई शिक्षक नियुक्ति घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जिसमें कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर पहले से ही शिकंजा कसा जा चुका है।

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