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करम: प्रकृति पर्व पर बहनों ने की भाइयों की दीर्घायु की प्रार्थना

करम: प्रकृति पर्व पर बहनों ने की भाइयों की दीर्घायु की प्रार्थना

▪︎ अखरा में श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना

▪︎ गूंजी ढोल-मांदर की थाप, रात भर होता रहा गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य

▪︎ राज्य के आदिवासी और मूलवासी विशेष उत्साह से हर वर्ष मनाते हैं यह त्योहार

Ranchi News: प्रकृति पर्व करम पर बुधवार को राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में उल्लास का माहौल देखने को मिला। करम गीतों और ढोल-मांदर की थाप पर राजधानी रांची के विभिन्न अखरा में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद देर रात तक झूमते-नाचते नजर आये। अखरा में रात भर गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य का दौर चला। करम पर्व को राज्य के आदिवासी और मूलवासी विशेष उत्साह से हर वर्ष मनाते हैं। इस दौरान श्रद्धालु ‘आले करम दूईए दिना, एसों करम साल देइये राखले, आले करम दुईए दिना…जैसे गीतों पर झूमते नजर आये I

उल्लेखनीय है कि करम पर्व हर वर्ष भादो मास की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति, फसल और भाई-बहन के अटूट रिश्तों को समर्पित माना जाता है। वहीं, इस दौरान अखरा में करम देवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की गयी। करम देवता से बहनें अपने भाइयों की लम्बी आयु और खुशहाली एवं कामयाबी की कामना की। पर्व के दौरान व्रती महिलाओं और बच्चियों ने पूरे दिन उपवास रख कर शाम में करम पेड़ की डाल को बड़े श्रद्धा भाव से अखरा में पहुंचा कर स्थापित किया। इसके बाद पाहनों ने उपवास रखे श्रद्धालुओं को पारम्परिक अनुष्ठान के साथ विधि-विधान से करमा की पूजा करायी और कथा सुनायी।

परम्परा के अनुसार करम महोत्सव के दूसरे दिन पूजा की गयी। करम डाल को जल में विसर्जित करने की प्रथा है। इसके साथ ही करम महोत्सव का समापन होता है।
करम पर्व पर पारम्परिक वेशभूषा में महिलाएं और युवक-युवतियां हाथों में हाथ डाल कर गोल घेरे में थिरकते नजर आये। इसके अलावा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भी करमा महोत्सव का आयोजन किया।

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