Palamu News : पलामू जिले के मनातू और तरहसी थाना के सीमावर्ती क्षेत्र काश और बंशी खुर्द जंगल के बीच प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) और सुरक्षाबलों के बीच रविवार को भीषण मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में टीएसपीसी के इनामी कमांडर मुखदेव यादव मारा गया, जिसका शव घटनास्थल से बरामद हुआ है। मुखदेव पर पांच लाख का इनाम घोषित था।
एसपी रीष्मा रमेशन ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में सर्च अभियान जारी है। जिस टीएसपीसी टीम के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई, उसी के साथ 03 सितम्बर की रात हुई मुठभेड़ में पलामू पुलिस के दो जवान बलिदान हुए थे।
इससे पहले 10 लाख के इनामी कमांडर शशिकांत को लेकर सर्च अभियान शुरू किया गया। सर्च अभियान में कोबरा, जगुआर और पलामू पुलिस को तैनात किया गया। सर्च अभियान के क्रम में मनातू के जंगलों में जैसे ही सुरक्षा बलों की टीम घुसी, टीएसपीसी के उग्रवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसमें इनामी कमांड मुखदेव मारा गया। मुठभेड़ स्थल से शव और इंसास राइफल बरामद किया गया है।
मुखदेव पर थे 24 से अधिक मामले दर्ज, लम्बे समय से था सुरक्षा बलों के निशाने पर
झारखंड में पलामू जिले के मनातू और तरहसी के सीमावर्ती जंगल में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गये तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का कमांडर मुखदेव यादव के खिलाफ 24 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह लम्बे समय से सुरक्षा बलों के निशाने पर था। पलामू पुलिस ने रविवार को इसकी जानकारी दी है।
पुलिस के अनुसार मुखदेव यादव बिहार और झारखंड में आतंक का पर्याय बना हुआ था। उसके खिलाफ दर्ज मामलों को देख कर और पलामू पुलिस की अनुशंसा पर इसी वर्ष मार्च 2025 में झारखंड सरकार ने 05 लाख का इनाम घोषित किया था। टीएसपीसी के मुखिया शशिकांत दस्ते के लिए वह लेवी वसूलने का काम करता था और हथियार की डील करता था। शशिकांत का वह काफी करीबी माना जाता था।
03 सितम्बर को मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मुखदेव यादव भी शामिल था। पहली गोली उसी ने ही चलायी थी। इस घटना में जिला पुलिस के दो जवान संतन मेहता और सुनील राम बलिदान हो गये थे, जबकि एक जवान रोहित कुमार जख्मी हुए थे। संतन और सुनील का श्राद्ध कर्म अभी चल रहा है। इसी बीच पलामू पुलिस ने अपने दोनों जवानों की शहादत का बदला ले लिया।
पुलिस की कार्रवाई यही तक नहीं रुकी है। टीएसपीसी के कमांडर शशिकांत को घेरने के लिए 200 से अधिक जवानों को लगाया गया है, जिसमें जगुआर, कोबरा 209 के अलावा झारखंड पुलिस के जवान शामिल हैं।
इस बीच घटना की सूचना मिलने पर जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से पुलिस अधीक्षक रिष्मा रमेशन, एसडीपीओ के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। ढेर किये गये नक्सली के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
पुलिस के अनुसार 03 सितम्बर की मुठभेड़ के बाद मनातू और तरहसी के सुदूरवर्ती जंगली क्षेत्र में पुलिस का अभियान जारी था। इसी क्रम में जब पुलिस रविवार की सुबह भीतडीहा और कसमार के जंगल में पहुंची, तो उग्रवादियों की ओर से फायरिंग शुरू कर दी गयी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए एक उग्रवादी को मार गिराया। मौके से एक इंसास राइफल बरामद की गयी है। जिस क्षेत्र में मुखदेव यादव मारा गया, वह उसके गढ़ के रूप में चर्चित है और उसी इलाके में वह सक्रिय था।
मूल रूप से मनातू के मिटार का रहने वाला मुखदेव पहले भाकपा माओवादी का सदस्य था। बाद में वह टीएसपीसी में शामिल हो गया। उस पर पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में कई बड़े नक्सल हमले को अंजाम देने का आरोप है। मुखदेव हर वक्त अपने साथ इंसास राइफल रखता था। छह से अधिक बार पुलिस के साथ मुठभेड़ में भी शामिल रहा है। दो मुठभेड़ में चार जवान शहीद हुए हैं, जबकि एक हमले में आदि जनजाति परिवार के पिता और पुत्र की भी मौत हुई थी।



