संदर्भ : झारखंड क्रिकेट टीम की अनदेखी कर रॉबिन मिंज को रिलायंस का मैच खेलने के लिए रिलीज करना
Ranchi News : किसी भी संस्था को सही ढंग से चलाने के लिए अनुशासन और नियम कानून बहुत अहमियत रखता है। हम बात कर रहे हैं झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) की। हाल के दिनों में जेएससीए में जो घटनाएं हुई हैं, वह कुछ नई कहानी कह रही हैं। जेएससीए में अपने निजी फायदे के लिए झारखंड के हितों की अनदेखी की गई है। पिछले दिनों झारखंड अंडर – 23 क्रिकेट टीम के कप्तान रॉबिन मिंज को किस नियम के तहत झारखंड टीम से रिलीज किया गया और उसे रिलायंस की टीम से खेलने को कहा गया। यह ऐसी घटना है, जो स्पष्ट रूप से बताती है कि जेएससीए के अधिकारियों के लिए झारखंड क्रिकेट टीम से ज्यादा महत्वपूर्ण रिलायंस की टीम हो गई है। याद रखिए सौरभ तिवारी जी! बड़ी ही उम्मीद के साथ जेएससीए के सदस्यों ने आपको यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगर आप अपने फायदे के लिए जेएससीए का इस्तेमाल करेंगे तो आपको गद्दी से उतारने में तनिक भी देर ना लगेगी।
झारखंड टीम की हार का जिम्मेदार कौन
यह बताना जरूरी है कि रॉबिन मिंज ने रिलीज होने से पूर्व झारखंड की अंडर- 23 क्रिकेट टीम को बतौर कप्तान शानदार प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट दौर में पहुंचाया था। इस मैच के बाद जेएससीए के पदाधिकारी ने रॉबिन मिंज को रिलायंस की टीम का मैच खेलने के लिए उसे रिलीज कर दिया। नतीजतन झारखंड अंडर 23 क्रिकेट टीम नॉकआउट दौर के पहले ही मैच में पराजित होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। रॉबिन की अनुपस्थिति में झारखंड टीम की हालत बिन पतवार नैया हो गई। अब सवाल उठता है कि झारखंड टीम की पराजय के लिए कौन जिम्मेदार है, टीम के खिलाड़ी या रॉबिन को रिलीज करने वाला जेएससीए का पदाधिकारी।
गलत करेंगे तो सवाल तो उठेंगे ही
बताया जा रहा है कि झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के सचिन सौरभ तिवारी मुंबई इंडियंस के टैलेंट हंट कार्यक्रम के अधिकारी हैं। इसके एवज में उन्हें मुंबई इंडियंस की ओर से मोटी रकम भी दी जाती है। इसी कारण जेएससीए के सचिव सौरव तिवारी ने झारखंड अंडर 23 क्रिकेट टीम के कप्तान रॉबिन को रिलायंस का मैच खेलने के लिए रिलीज करवाया।
सौरव तिवारी ने नहीं उठाया फोन
इस बाबत झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। आप सचिव सौरव तिवारी से बातचीत कर सकते हैं। जब सौरव तिवारी को फोन लगाया गया तो उन्होंने कॉल नहीं उठाया। इस कारण उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।



