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धनबाद क्रिकेट संघ में परिवारवाद की पराकाष्ठा, खेल और खिलाड़ियों पर पड़ रहा गहरा असर

धनबाद क्रिकेट संघ में परिवारवाद की पराकाष्ठा, खेल और खिलाड़ियों पर पड़ रहा गहरा असर

Dhanbad, Lochan Singh : कोयलांचल की क्रिकेट प्रतिभाओं को निखारने का दायित्व संभालने वाला धनबाद क्रिकेट संघ (डीसीए) इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। संघ पर परिवारवाद की जकड़न इतनी मजबूत हो चुकी है कि यह संस्था अब खेल के बजाय कुछ खास लोगों के निजी नियंत्रण का माध्यम बनती नजर आ रही है। पिछले लगभग 25 वर्षों से अध्यक्ष मनोज कुमार और महासचिव विनय सिंह (जीजा-साले की जोड़ी) पर संघ को अपने प्रभाव में रखने के आरोप लगातार लगते रहे हैं।

महत्वपूर्ण पदों पर परिवार का कब्जा

बताया जाता है कि इस दौरान संघ की संरचना इस तरह तैयार की गई है, जिसमें अधिकांश महत्वपूर्ण पदों और आजीवन सदस्यता पर एक ही परिवार या करीबी रिश्तेदारों का कब्जा है। यही वजह है कि संघ के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया लगभग खत्म होती दिख रही है। खिलाड़ी और सामान्य सदस्य अपनी बात रखने से कतराते हैं, क्योंकि विरोध करने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। पूर्व में एसए रहमान जूनियर और राजकुमार सिंह जैसे नामों का उदाहरण दिया जाता है, जिन्हें कथित तौर पर विरोध की कीमत चुकानी पड़ी।
संघ की मौजूदा संरचना पर नजर डालें तो अध्यक्ष मनोज कुमार के साथ महासचिव उनके साले विनय सिंह हैं। इसके अलावा आजीवन सदस्य के रूप में मनोज कुमार के भाई, बेटे, भतीजे, साढ़ू, मौसेरे भाई सहित कई रिश्तेदार शामिल हैं। वहीं विनय सिंह के बेटे, भाई, चाचा, भतीजे और अन्य करीबी भी संघ में विभिन्न भूमिकाओं में मौजूद हैं। इस तरह डीसीए की कार्यप्रणाली पर एक ही परिवार का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। संघ के अन्य पदाधिकारियों पर भी परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप हैं। वरीय उपाध्यक्ष साधवेंद्र सिंह द्वारा अपने बेटे और भतीजे को आजीवन सदस्य बनवाने की बात सामने आई है। वहीं कोषाध्यक्ष ललित जगनानी ने भी अपनी बेटी और नजदीकी लोगों को सदस्यता दिलाने में भूमिका निभाई है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि संघ में पद और सदस्यता योग्यता के बजाय रिश्तों के आधार पर बांटे जा रहे हैं।

अकेले 9 वोट के मालिक हैं विनय सिंह

अब बात करते हैं धनबाद क्रिकेट संघ के महासचिव विनय सिंह की। कहने को तो वह एक व्यक्ति हैं। लेकिन धनबाद क्रिकेट संघ के चुनाव में वह 9 वोट डालने का अधिकार रखते हैं। वह आठ क्लब के अध्यक्ष और सचिव हैं। उपर्युक्त परिस्थितियों से समझा जा सकता है कि विनय सिंह और मनोज कुमार धनबाद क्रिकेट संघ पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए क्या-क्या कृत्य कर रहे हैं।

आईए जानें डीसीए में कौन किसका रिश्तेदार

धनबाद क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार हैं।
महासचिव विनय सिंह ( मनोज कुमार के साले)।
आजीवन सदस्य अशोक कुमार ( मनोज कुमार के भाई)।
आजीवन सदस्य प्रत्यूष (मनोज कुमार के बड़े बेटे)।
आजीवन सदस्य आदित्य सिंह मनोज कुमार के भतीजे।
सह. कोषाध्यक्ष सुनील कुमार (मनोज कुमार के मौसेरे भाई)
आजीवन सदस्य राजीव रंजन सिंह (मनोज कुमार के साडू)
कार्यकारिणी सदस्य जितेंद्र कुमार सिंह (मनोज कुमार के छोटे साले और महासचिव विनय सिंह के छोटे भाई)।
आजीवन सदस्य कुंदन कुमार सिंह (मनोज कुमार के बड़े साले के बेटे और विनय सिंह के भतीजे)
आजीवन सदस्य राहुल सिंह (मनोज कुमार के बड़े साले के छोटे बेटे और विनय सिंह के भतीजे)
आजीवन सदस्य अजय प्रताप सिंह (विनय सिंह के बेटे)
आजीवन सदस्य विजय प्रताप सिंह (विनय सिंह के बेटे)
आजीवन सदस्य राजगोपाल ( विनय सिंह का भागना)
आजीवन सदस्य विनोद सिंह (विनय सिंह के चाचा)
आजीवन सदस्य राहुल सिंह (विनय सिंह के चचेरे भाई)
आजीवन सदस्य रवि शेखर (मनोज सिंह के जीजा)
आजीवन सदस्य सत्यकांत (मनोज सिंह के जीजा)।

जीजा-साला क्रिकेट संघ

इस तरह की व्यवस्था से क्रिकेट का विकास बाधित होता है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर मिलने के बजाय चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का मनोबल टूटता है, बल्कि जिले की क्रिकेट प्रतिभा भी प्रभावित होती है। मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि यह अब “धनबाद क्रिकेट संघ” कम और “जीजा-साला क्रिकेट संघ” अधिक बन गया है। प्रबंधन समिति और अन्य समितियों की भूमिका भी सीमित होती जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

धनबाद की समृद्ध क्रिकेट परंपरा को बचाने की जरूरत

ऐसे में जरूरत है कि समय रहते इस स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाए। यदि सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। धनबाद की समृद्ध क्रिकेट परंपरा को बचाने के लिए निष्पक्षता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली अब बेहद जरूरी हो गई है।

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