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बच्चों के लिए सरकारी फंड नहीं ! तस्करों से बचाए गए दस बच्चों को थाने में गुजारनी पड़ी रात

बच्चों के लिए सरकारी फंड नहीं ! तस्करों से बचाए गए दस बच्चों को थाने में गुजारनी पड़ी रात

विशाखापत्तनम ले जाए जा रहे दस बच्चों को मानव तस्करों से छुड़ाने के बाद इन्हें आश्रयगृह में रखने में पुलिस के पसीने छूट गए। रात में पुलिस को पांच घंटे तक बच्चों को आश्रयगृह में रखने के लिए चक्कर लगाना पड़ा पर बच्चों को कहीं शरण नहीं मिली। अंतत: बच्चों को थाने में ही रात गुजारनी पड़ी।

रांची में नगड़ी में मुक्त कराए गए थे बच्चे

मिली जानकारी के अनुसार नगड़ी के पास मुक्त कराए गए बच्चों को शाम सात बजे से शरण देने की कवायद शुरू हुई। रांची से लेकर खूंटी तक के आश्रयगृह खंगाले गए। जब कहीं शरण नहीं मिली तो रात 12 बजे पुलिस बच्चों को नगड़ी थाने लेकर पहुंची। पूरी रात नगड़ी थाने में ही बच्चों ने रात गुजारी। रविवार सुबह छह बजे चुटिया के ओपन शेल्टर होम में इन्हें रखा गया।

बच्चों के लिए नहीं मिली जगह

जानकारी के अनुसार नगड़ी पुलिस ने बच्चों को मुक्त कराने के बाद सीडब्ल्यूसी को सूचना दी व आश्रय के लिए जगह मांगी। इसके बाद सीडब्ल्यूसी व जिला बाल संरक्षण कार्यालय ने निवारणपुर स्थित आदिम जनजाति सेवा मंडल से संपर्क किया, लेकिन संस्थान ने यह कहते हुए बच्चों को रखने से इनकार कर दिया कि उन्हें सरकार फंड नहीं देती। इसके बाद बच्चों को खूंटी स्थित शेल्टर होम ले जाया गया, लेकिन यहां भी जगह नहीं होने की बात कह लौटा दिया गया। नगड़ी थाना प्रभारी विनोद राम ने कहा कि कहीं जगह नहीं मिलने पर देर रात बच्चों के साथ हम वापस थाना आ गए। वहीं बच्चों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई।

क्या कहते हैं संबंधित पदाधिकारी

आदिम सेवा मंडल ने शेल्टर होम सरेंडर कर दिया है। यह संस्था बंद होने की स्थिति में है। फिलहाल रांची में बच्चों को रखने के लिए शेल्टर होम नहीं है। -वेदप्रकाश तिवारी, बाल संरक्षण पदाधिकारी सोमवार को बच्चों को सीडब्ल्यूसी कोर्ट में पेश किया गया। अब उनके अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। 

अजय शाह, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी, रांची।

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