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शाबाश सादिओ शाबाश ! आपकी सादगी और सोच को सलाम, काश! भारत में होता ऐसा खिलाड़ी

शाबाश सादिओ शाबाश  ! आपकी सादगी और सोच को सलाम, काश! भारत में होता ऐसा खिलाड़ी

वैसे तो दुनिया में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हैं। इससे अछूता भारत भी नहीं है। यहां भी अब तक कई खिलाड़ी ऐसे हुए, जिन्होंने दुनिया में भारत का परचम लहराया। लेकिन पश्चिमी अफ्रीका के एक छोटे से देश सेनेगल के विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर 27 वर्षीय सादिओ माने सेनेगल जैसा खिलाड़ी होना बहुत बड़ी बात है। भारत में भी अरबों  रुपए कमाने वाले खिलाड़ी है, लेकिन सादिओ जैसा होना सबके लिए संभव नहीं है। वह फुटबॉल के अलावा सादगी और समाज सेवा के लिए जाने जाते हैं। वैसे तो उनकी औसत कमाई हर सप्ताह एक करोड़ 40 लाख रुपए है। उनके पास संपत्ति का अकूत भंडार है। वह चाहे तो एक साथ 10 फेरारी कार और दो जेट प्लेन चंद मिनटों में ही खरीद सकते हैं। इसके बावजूद वह बेहद ही साधारण जीवन जीते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह खिलाड़ी पैसे कहां खर्च करता है। 

टूटे हुए फोन का करते हैं इस्तेमाल

आपको जानकर यह हैरानी होगी कि जिस खिलाड़ी की कमाई हर महीने पांच से छह करोड़ रुपए है, वह टूटे हुए स्मार्टफोन का इस्तेमाल क्यों करता है।‌ बता दें कि यह खिलाड़ी अक्सर ही टूटे हुए फोन के साथ दिख जाता है। वह बेहद साधारण कपड़े पहनते हैं। इतना ही नहीं अपने ऊपर कम से कम पैसे खर्च करते हैं, ताकि वह बचे हुए पैसे का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च किया जा सके।

मैं एक साथ 10 फेरारी कार और दो जेट प्लेन खरीद सकता हूं लेकिन मुझे यह सब क्यों चाहिए

एक इंटरव्यू में जब उनसे उसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा मैं उसे ठीक करवा लूंगा,जब उनसे पूछा गया कि आप नया क्यों नही ले लेते,तब उन्होंने कहा मैं ऐसे हजार खरीद सकता हूँ, 10 फरारी , 2 जेट प्लेन , डायमंड घड़ियां खरीद सकता हूँ।। लेकिन मुझे ये सब क्यों चाहिए। मैंने गरीबी देखी है। मैं गरीबी के कारण पढ़ नहीं पाया। मैं चाहता हूं कि पैसे की कमी के कारण मेरे जैसा हाल किसी दूसरे बच्चे का न हो, इसलिए मैंने कई स्कूल बनवाए हैं। इन स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा रही है। ऐसा करने से मुझे संतुष्टि मिलती है।

गरीबी क्या होती है मैंने देखी है

उन्होंने कहा कि जब वह बचपन में फुटबॉल खेला करते थे तो उनके पास जूते नहीं थे। लेकिन फुटबॉल के प्रति मेरी दीवानगी में कोई कमी नहीं आई। मैंने वर्षों तक खाली पैर फुटबॉल खेला। उस वक्त मेरे पास खाने के पैसे नहीं थे। कपड़े भी नहीं थे। बावजूद मैंने अपने संघर्षों के बल पर इस मुकाम को हासिल किया। आज मुझे इतना कुछ मिला है तो मैं उसका दिखावा करने के बजाए मैं उसे अपने लोगों के साथ बांटना चाहता हूं। अगर किसी वस्तु से मेरा काम चल रहा है तो मैं उसे तब तक नहीं बदलता जब तक कि वह खराब नहीं हो जाता। मैं गैर वाजिब चीजों में पैसे खर्च नहीं करना चाहता। मैं पैसे की कीमत को समझता हूं कि जरूरतमंदों के लिए यह कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए जीता है सच्चे मायने में वही मनुष्य है।

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