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मोदी सरकार 3.0 का पहला पूर्णकालीक बजट 23 जुलाई को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी पेश 

मोदी सरकार 3.0 का पहला पूर्णकालीक बजट 23 जुलाई को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी पेश 

New Delhi news : मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट 23 जुलाई को पेश होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया की संसद का बजट सत्र 22 से 12 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2024-25 का बजट पेश करेंगी। केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने बजट सत्र, 2024 के लिए संसद के दोनों सदनों को 22 जुलाई, 2024 से 12 अगस्त, 2024 तक बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं, केन्द्रीय बजट, 2024-25, 23 जुलाई, 2024 को लोकसभा में पेश किया जायेगा। चुनावी वर्ष होने के कारण इस साल दो बार बजट पेश हो रहा है। इसके पहले एक फरवरी, 2024 को एक अंतरिम बजट पेश किया गया था। अब सरकार के गठन के बाद पूर्ण बजट पेश किया जायेगा।

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नारी शक्ति को सशक्त बनाने को हो सकते कई एलान  

केन्द्रीय बजट 2024-25 में कई सेक्टर और वर्ग सब्सिडी, टैक्स राहत और अन्य सब्सिडी की उम्मीद कर रहे हैं। मोदी सरकार 3.0 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी टीम के साथ बजट में महिलाओं को सशक्त बनाने कुछ बड़े एलान कर सकती हैं। साथ ही, कुछ पॉलिसी को लेकर भी बदलाव कर सकती हैं। इसमें सब्सिडी में बढ़ोतरी और महत्त्वपूर्ण वस्तुओं की लागत को कम करने पर फोकस हो सकता है।  

फरवरी में अंतरिम बजट 2024 के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने खुलासा किया कि मुद्रा योजना के तहत 30 करोड़ के लोन महिला उद्यमियों को वितरित किये गये हैं। इसके अलावा, 83 लाख स्वयं सहायता समूह (सीएचजी) और एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनने के लिए समर्पित हैं।  

जानकारों का मानना है कि पूर्ण बजट 2024 में महिलाओं की बेहतरी के लिए सब्सिडी लागू करना और महत्त्वपूर्ण वस्तुओं की कीमतों को कम करने के लिए टैक्स में अतिरिक्त छूट मिल सकती है। खासकर, रसोई गैस से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर सब्सिडी मिल सकती है। इसके अलावा, महिलाओं को टैक्स छूट देने पर भी मोदी सरकार विचार कर सकती है। ये टैक्स छूट काफी अलग हो सकते हैं। ये छूट मैरिज, रोजगार की स्थिति और माता-पिता की जिम्मदारियों जैसे कारकों पर निर्भर करता है। 

इन चीजों पर मिल सकती है टैक्स छूट 

मैरिज स्टेटस : विवाहित महिलाओं के लिए टैक्स छूट में संयुक्त फाइलिंग विकल्प या विवाहित जोड़ों के लिए टैक्स क्रेडिट जैसे लाभ शामिल हो सकते हैं।  

रोजगार स्टेटस : कामकाजी महिलाएं कार्य-सम्बन्धी व्यय, रिटारमेंट कंट्रीब्यूशन या शिक्षा व्यय से सम्बन्धित टैक्स कटौती के लिए पात्र हो सकती हैं।  

माता-पिता की जिम्मेदारियां : बच्चों वाली महिलाएं टैक्स क्रेडिट, कटौती या बच्चों की देखभाल सब्सिडी या शिक्षा बचत योजना जैसे लाभों के लिए पात्र हो सकती हैं। 

रियायती टैक्स स्लैब : जानकारों का कहना है कि सरकार विशेष रूप से महिलाओं के लिए रियायती टैक्स स्लैब दरों को फिर से लागू करने पर विचार कर सकती है। इस पहल का उद्देश्य महिला टैक्सपेयर्स के लिए कम टैक्स रेट्स की पेशकश करके आर्थिक सशक्तीकरण पेश करना हो सकता है। 

माता-पिता की टैक्स कटौती : कई देश जैसे अमेरिका, कनाडा, आदि माता-पिता के लिए कर क्रेडिट या कटौती प्रदान करते हैं, जो विशेष रूप से सिंगल मदर के लिए फायदेमंद हो सकता है। ये क्रेडिट बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी लागतों को कम करने में मदद करते हैं।  

मेडिकल खर्च : इसके अलावा मेडिकल खर्च के लिए कटौती विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए प्रासंगिक हो सकती है, जो उच्च स्वास्थ्य देखभाल लागत वहन करती हैं। इसके अलावा, महिलाओं की ओर से ली गयी पॉलिसियों पर भुगतान किये गये मेडिक्लेम बीमा के लिए धारा 80डी के तहत बढ़ी हुई कटौती की सुविधा दी गयी है।

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