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भाजपा का परिवारवाद : दो पूर्व सीएम की पत्नी,दो की बहू और एक के बेटे को टिकट

भाजपा का परिवारवाद : दो पूर्व सीएम की पत्नी,दो की बहू और एक के बेटे को टिकट

हेवीवेट नेताओं के परिजनों को टिकट देकर चुनावी नैया पार करना चाहती है भाजपा

दिनेश सिंह / Ranchi News : भाजपा ने झारखण्ड विधानसभा चुनाव के अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी l इस लिस्ट में कई बड़े नेताओं के परिजनों का नाम है l परिवारवाद के विरुद्ध जमकर हल्ला मचाने वाली भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे,बहु और पत्नी को इस चुनाव में उतारने जा रही है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन,अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा,मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा तो राजनीति से पूर्व से जुड़ी हैं, परंतु इसमें सबसे चौकाने वाला नाम पूर्व मुख्यमंत्री और ओड़िशा के राज्यपाल रघुबर दास की बहू पूर्णिमा दास साहू का है। वही भाजपा ने पूर्व सीएम चंपई सोरेन को सरायकेला सीट से टिकट दिया है तो उनके बेटे बाबूलाल सोरेन को घाटशिला से टिकट दिया है। भाजपा कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाहती है, पांच पूर्व सांसद को भी टिकट देने की घोषणा की है, पूर्व सीएम बाबूलाल कोडरमा से सांसद भी रहे है, जिन्हे राजधनवार से,सुनील सोरेन को दुमका,रवीन्द्र पांडेय को बेरमो, सुदर्शन भगत को गुमला,और विशुनपुर से समीर उरांव को उतारा है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव परिणाम को देखते हुए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने परिवार वाद को लेकर खुद की बनाई नरेटिव को तोड़ने का काम किया हैl हरियाणा विधानसभा चुनाव में परिवार के लोगों को टिकट देकर फायदे में रही हैl झारखंड में भी बाबूलाल को उतारने के साथ पूर्व सीएम रघुबर की बहू और चंपई के बेटे को टिकट देकर संतुलन बनाने की कोशिश की है l तीन seating MLA किसुन दास, मेनका सरदार, समरी लाल को छोड़ शेष किसी का भी टिकट काटने का रिस्क नहीं लिया है। विश्लेषक बताते हैं कि कई लेवल पर हुए सर्वे, हेमंत विश्व सरमा और शिवराज सिंह चौहान की सहमति पार्टी की यह रणनीति सामने आयी है l

2019 विधानसभा चुनाव परिणाम से पार्टी ने ली सबक

वर्ष 2019 के चुनाव में रघुबर दास के नेतृत्व में हुए विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में मनमानी की गई l इसमें सरयू राय का टिकट काटा गया, अर्जुन मुंडा का नहीं चला, आजसू के साथ गठबंधन नहीं हुआ l चुनाव में रघुबर खुद हार गए और पार्टी का भी कोल्हान में सफ़ाया हो गया l इस बार आजसू से गठबंधन हुआ और पार्टी ने भी सभी धड़े के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है l कोल्हान में पिछले चुनाव में हुई क्षति की भरपाई के लिए सरयू और रघुबर के बीच संतुलन बनाया गया है l

कोल्हान में रघुबर,अर्जुन और सरयू के बीच संतुलन बनाने का प्रयास

इस बार पूर्णिमा दास साहू अपने ससुर रघुबर की खोई हुई विरासत वापस लेने के लिए जमशेदपुर पूर्वी सीट से उतरेगी, वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा के बागी निर्दलीय प्रत्याशी सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुबर दास को हराया था। उस वक़्त सरयू राय जमशेदपुर पश्चिमी से विधायक थे,ऐसा कहा जाता है कि रघुबर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनका टिकट कटवा दिया थाl चुनाव में रघुबर दास की हार हुई वही भाजपा भी सता से बाहर चली गई परंतु रघुबर दास की ताकत कम नहीं हुई, वे आलाकमान के नजदीकी बने रहे। पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष के साथ चुनाव में कई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा l अर्जुन मुंडा केंद्र में मंत्री थे,बाबूलाल जी की भाजपा में वापसी हुई और झारखंड की राजनीति में संतुलन बनाए रखने के लिए रघुबर दास के कद को ऊँचा करते हुए ओडिशा का राज्यपाल बनाया l उन्हें झारखंड की सक्रिय राजनीति से अलग की गई परंतु कहा यह जाता है कि झारखंड में उनकी भूमिका हमेशा बनी रही है l 2024 के लोकसभा चुनाव के टिकट बंटवारे में उनके कई चहेतों को टिकट दी गई l जदयू से समझौते के तहत सरयू राय को टिकट दी गई,परंतु यहां भी रघुबर का चला और सरयू की विदाई पूर्वी से पश्चिम जमशेदपुर की गई। चुनाव के दौरान रघुबर और सरयू के समर्थक एक दूसरे के पक्ष या विरोध में कार्य करेंगे यह तो वक़्त ही बतायेगाl

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