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कोयला माफिया अब्दुल चौधरी मुठभेड़ में ढेर, जीते जी बनवा लिया था मृत्यु प्रमाणपत्र, 43 मुकदमे हैं दर्ज

कोयला माफिया अब्दुल चौधरी मुठभेड़ में ढेर, जीते जी बनवा लिया था मृत्यु प्रमाणपत्र, 43 मुकदमे हैं दर्ज

मेघालय, मिजोरम सहित दक्षिण असम की बराक घाटी में कोल डॉन के रूप में जाना जानेवाले कोयला माफिया अब्दुल चौधरी को पुलिस ने मार गिराया है।

हैलाकांदी जिले में पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान मुठभेड़ में करीमगंज निवासी पूर्वोत्तर का कुख्यात कोयला माफिया अब्दुल अहद चौधरी मारा गया। यह मुठभेड़ हैलाकांदी और करीमगंज जिले के सीमावर्ती लक्ष्मीनगर इलाके में हुई। दुनिया को धोखा देने के लिए चौधरी ने जीते जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था। उसके खिलाफ असम, मिजोरम और मेघालय के विभिन्न थानों में 43 मुकदमे दर्ज हैं। यह जानकारी पुलिस ने रविवार को दी।

घर पर ही पुलिस के हत्थे चढ़ा कोल माफिया

पुलिस ने बताया कि कोयला माफिया के शव को संतोष कुमार राय सदर अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के मुताबिक हैलाकांदी जिला के लाला थाना अंतर्गत गगलाछारा में 10 अप्रैल को एक ट्रक को फर्जी दस्तावेजों के साथ जब्त किया गया था। इस ट्रक में कोयला लोड था। इसका संबंध चौधरी से था। ओसी अलंगबर बासुमतरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रात में चौधरी के घर (करीमगंज में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुतारकांदी) पर दबिश दी। संयोग से वह घर पर मिल गया। उसे गिरफ्तार कर लाला थाना लाया गया। पुलिस स्वास्थ्य जांच के लिए शनिवार मध्य रात्रि उसे लॉकअप से निकालकर हैंडकप पहनाकर लाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जा रही थी। अचानक वह मौका पाकर हैंडकप लेकर फरार हो गया।

पुलिस में बिछा रखा था वह मुखबिरों का जाल

पुलिस के मुताबिक आनन-फानन में जिला करीमगंज और मिजोरम पुलिस के साथ हैलाकांदी पुलिस को अलर्ट कर मुखबिरों का जाल बिछाया गया। एक मुखबिर की सूचना पर लक्ष्मीनगर में छापा मारा गया। पुलिस को देखकर अब्दुल अहद ने भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे रोकने के लिए गोली चला दी। गोली लगते ही वह बैठ गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मगर वह अपनी हरकत से बाज नहीं आया। थाने से अस्पताल ले जाते हुए फिर भागने की कोशिश की और मारा गया।

साल 2018 में भी किया गया था गिरफ्तार

अब्दुल चौधरी को मेघालय, मिजोरम सहित दक्षिण असम के बराक घाटी में कोल डॉन के रूप में जाना जाता है। उसके खिलाफ करीमगंज सदर थाना में एक, बदरपुर थाना में एक, लाला थाने में एक कटिगारा थाने में तीन, करीमगंज मुख्य न्यायिक अदालत में तीन, करीमगंज पुलिस स्टेशन में 29 के अलावा मिजोरम के कानमुन पुलिस स्टेशन में कई मामले दर्ज हैं। उसे पहली बार 2018 में करीमगंज में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक करीमगंज के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव उपाध्याय के नेतृत्व में 12 जुलाई, 2018 को करीमगंज के सुतारकंदी स्थित अब्दुल अहद के घर दिन भर चली तलाशी में कंप्यूटर, सीपीयू समेत तमाम सनसनीखेज दस्तावेज बरामद हुए थे। इसमें डायरी और उसका मृत्यु प्रमाणपत्र भी शामिल था। उपाध्याय अब हैलाकांदी के पुलिस अधीक्षक हैं।

डायरी देख पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गईं

चौधरी की डायरी के पेज पलटते ही पुलिस अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गई थीं। इसमें रोजाना के खर्चे के नाम कई बड़े नेताओं, विधायकों, पुलिस अधिकारियों, बीएसएफ समेत 19 लोगों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के नाम थे। इनमें करीमगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, तत्कालीन डीआईजी, तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, मेघालय के तत्कालीन एक पुलिस अधीक्षक,कई एंटी-इनकंबेंसी राजनीतिक नेताओं और मेघालय के खान और खनिज प्राधिकरण के निदेशक के अलावा तीन विधायकों के नाम थे। वह कई वर्षों से भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती जिले करीमगंज के साथ-साथ बराक घाटी सहित पूरे राज्य में अवैध कोयले का कारोबार कर रहा था।

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