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आज हम सिर्फ वर्क-फोर्स नहीं, बल्कि वर्ल्ड-फोर्स हैं: मोदी

आज हम सिर्फ वर्क-फोर्स नहीं, बल्कि वर्ल्ड-फोर्स हैं: मोदी

▪︎ प्रधानमंत्री ने कहा- आज भारत दुनिया का वह देश, जहां लगातार क्रिएट होती है पॉजिटिव न्यूज

New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दशकों तक दुनिया भारत को अपना बैक ऑफिस कहती रही है। आज भारत न्यू फैक्टरी ऑफ द वर्ल्ड के रूप में उभर रहा है। हम सिर्फ वर्क-फोर्स नहीं, बल्कि वर्ल्ड-फोर्स हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात यहां भारत मंडपम् में आयोजित एनएक्सटी कॉन्क्लेव में कही। उन्होंने इस दौरान न्यूजएक्स वर्ल्ड चैनल भी लॉन्च किया।

जो सामान आयात करते थे, अब उनका स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया जा रहा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले हम जो सामान आयात करते थे, अब उनका स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। देश उन उत्पादों के निर्यात केन्द्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि किसान जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, अब अपनी फसलों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचते देख रहे हैं। पुलवामा के बर्फीले मटर, महाराष्ट्र के पुरंदर अंजीर और कश्मीर के क्रिकेट बैट जैसे उत्पादों की दुनिया भर में मांग है ।

आज भारत बहुत बड़े टारगेट्स रख पा रहा है और उनको अचीव कर रहा है, तो इसके मूल में एक खास मंत्र है

उन्होंने कहा कि आज भारत बहुत बड़े टारगेट्स रख पा रहा है और उनको अचीव कर रहा है, तो इसके मूल में एक खास मंत्र है। यह मंत्र मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस है। यह कुशल एवं प्रभावी शासन का मंत्र है। एक दशक में हमने करीब 1,500 ऐसे कानूनों को खत्म किया है, जो अपना महत्त्व खो चुके थे। इनमें से बहुत सारे कानून अंग्रेजी शासन के दौरान बने थे। प्रधानमंत्री ने दिल्ली में खान मार्किट गैंग और लुटियंस गैंग पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे उस समय की सरकार और नेताओं से कुछ कहना नहीं है, लेकिन मुझे ज्यादातर तो ये लुटियन जमात पर आश्चर्य हो रहा है, यह खान मार्केट गैंग पर आश्चर्य हो रहा है। ये लोग 75 साल तक ऐसे कानून पर चुप क्यों थे ? यह हमारी सरकार है, जिसने गुलामी के कालखंड के कानून को खत्म किया ।

पिछले दशक में 2.5 करोड़ से अधिक घरों को पहली बार बिजली मिली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दशक में 2.5 करोड़ से अधिक घरों को पहली बार बिजली मिली। बिजली की मांग और उत्पादन में इस वृद्धि के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग में वृद्धि हुई। सस्ते डेटा ने मोबाइल फोन की मांग को और बढ़ा दिया, जिसके कारण डिजिटल उपकरणों की खपत में वृद्धि हुई। इस मांग को अवसर में बदल कर हमने पीएलआई योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किये और भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा निर्यातक बन गया है ।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत पर आज पूरी दुनिया की नजर है। दुनिया भर के लोग भारत आना चाहते हैं, भारत को जानना चाहते हैं। आज भारत, दुनिया का वह देश है, जहां पॉजिटिव न्यूज लगातार क्रिएट हो रही है। न्यूज मैन्यूफेक्चर नहीं करना पड़ रहा है। जहां हर रोज नये रिकॉर्ड बन रहे हैं, कुछ न कुछ नया हो रहा है। उन्होंने कहा कि 26 फरवरी को ही प्रयागराज में एकता का महाकुम्भ सम्पन्न हुआ है। पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक अस्थायी शहर में, नदी के तट पर करोड़ों लोगों ने स्नान किया। आज दुनिया भारत की आयोजन और नवाचार कौशल क्षमता को देख रही है। हम सेमीकंडक्टर से लेकर एयरक्राफ्ट तक यहीं पर तैयार कर रहे हैं। दुनिया, भारत की इसी सफलता को विस्तार से जानना चाहती है ।

60 साल बाद ऐसा हुआ जब भारत में कोई सरकार लगातार तीसरी बार वापस लौटी

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले ही, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े चुनाव कराये हैं। 60 साल बाद ऐसा हुआ जब भारत में कोई सरकार लगातार तीसरी बार वापस लौटी है। इस जन विश्वास का आधार पिछले 11 साल में भारत की अनेक उपलब्धियां हैं। मुझे विश्वास है कि आपका नया चैनल भारत की रियल स्टोरी दुनिया तक पहुंचायेगा। बिना कोई रंग दिये आपका ग्लोबल चैनल, भारत की वैसी ही तस्वीर दिखायेगा, जैसा वह है। हमें मेकअप की जरूरत नहीं है।

कई साल पहले उन्होंने वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल का विजन देश के सामने रखा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई साल पहले उन्होंने वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल का विजन देश के सामने रखा था। आज हम इस विजन को वास्तविकता में बदलते हुए देख रहे हैं। आज हमारे आयुष प्रोडक्ट्स और योग, लोकल से ग्लोबल हो गये हैं। आज भारत के सुपरफूड, हमारा खाना, लोकल से ग्लोबल हो रहा है। भारत के मिलेट्स- श्रीअन्न भी, लोकल से ग्लोबल हो रहे हैं। भारत, दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी एक्सपोर्टर बन गया है।

उन्होंने कहा कि दुनिया को शून्य की अवधारणा देनेवाला भारत आज अनन्त नवाचारों की भूमि बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का युवा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों से परे सोचने का अवसर दिया है।

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