Mumbai news : मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री के पुराने जमाने के इतिहास पर दृष्टिपात करें तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मां की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्रियों में निरूपा राय और दुर्गा खोटे का नाम उत्कृष्ट है। इन दोनों अभिनेत्रियों ने मां के चरित्र को पर्दे पर जिया, भले उनकी जिंदगी के दुख-दर्द की कहानी जो भी हो। आज हम चर्चा करना चाहते हैं फिल्मी दुनिया की मां के रूप में स्थापित दुर्गा खोटे की जिंदगी और उनकी उपलब्धियां की दास्तान की। 1905 में जन्मी जिस अभिनेत्री ने 86 साल की उम्र में आज से 34 साल पहले दुनिया छोड़ दी हो, उसे आज भी उसकी दर्द भरी जिंदगी और कमाल की एक्टिंग के लिए याद किया जाता है। उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए दादा साहब फाल्के अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।
मुगल-ए-आजम में बनी थीं जोधाबाई
दुर्गा खोटे का जन्म एक अमीर परिवार में हुआ था। उन्होंने बीए तक पढ़ाई की। इसके बाद कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई थी। शादी के बाद दो बच्चे हुए थे, लेकिन दुर्भाग्य से 26 साल की उम्र में ही उनके पति का निधन हो गया था। ऐसी ट्रेजेडी भरी जिंदगी जीने और संघर्ष करने के साथ उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और कामयाबी का बड़ा मुकाम हासिल किया। कहा जाता है कि उन्होंने घर चलाने के लिए ट्यूशन भी पढ़ाया था। याद कीजिए, मुगल-ए-आजम (1960) में जोधाबाई का रोल प्ले किया था। इस रोल को बेहद पसंद किया गया था। पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार की जबरदस्त एक्टिंग के बीच एक मां और पति के रूप में उनका रोल आज भी याद किया जाता है। इसके अलावा फिल्म भरत मिलाप में उनके कैकयी के रोल को भी बहुत पसंद किया गया था।
नहीं चली थी पहली फिल्म
बताया जाता है कि दुर्गा खोटे की पहली फिल्म चली नहीं थी। फिर उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली। लेकिन, बाद में शानदार कमबैक किया। उन्होंने दौलत के दुश्मन, कर्ज, चोर सिपाही, पापी, पहेली, इंसानियत, बिदाई, दूर नहीं मंजिल, बॉबी, मेरे भैया, बावर्ची, आनंद, गोपी, खिलौना, प्यार का सपना, सपनों का सौदागर, दादी मां, अनुपमा, काजल, दूर की आवाज जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय कर कामयाबी का झंडा गाड़ दिया।



