Ranchi news: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन सोमवार को 11 बज कर 10 मिनट में सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सदन की शुरुआत होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में लचर विधि व्यवस्था का सवाल उठाया और इस पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को सरकार का संरक्षण मिल रहा है और यह स्थिति हेमन्त सरकार की वजह से बनी है। मरांडी ने कहा कि राज्य में लगातार हत्याएं हो रही हैं और ऐसा लगता है कि राज्य में अपराधियों का हौसला बढ़ गया है, ‘हेमन्त है, तो हिम्मत है।’
इसके बाद भाजपा के विधायक वेल में आ गये और नारेबाजी करने लगे। इस पर स्पीकर रवीन्द्रनाथ महतो ने सदस्यों को समझा-बुझा कर उन्हें सीट पर बैठने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा जारी रहा। अंतत: स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 12:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
वित्तीय कुप्रबंधन पर भाजपा की राफिया नाज ने हेमन्त सरकार को घेरा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने झारखंड सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त बजट होते हुए भी वह योजनाओं के अनुसार खर्च नहीं कर पा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों में सरकार ने योजना बजट की केवल 63 प्रतिशत राशि खर्च की है, जबकि 37 प्रतिशत राशि अब भी लम्बित है। यह दर्शाता है कि हेमन्त सरकार विकास विरोधी है और जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में असफल रही है।
राफिया ने कहा कि यह वित्तीय अराजकता और नाकाम प्रबंधन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने बताया कि सरकार शहरी विकास पर 23 प्रतिशत, खाद्य आपूर्ति पर 29 प्रतिशत, परिवहन पर छह प्रतिशत, पेयजल एवं स्वच्छता पर 10 प्रतिशत और आईटी विभाग पर मात्र पांच प्रतिशत राशि खर्च कर पाई है। राज्य की सरकार की नाकामी को उजागर करता है, जहां तकनीकी क्षेत्र को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के जरिये महत्त्वपूर्ण विभागों पर खर्च की कमी से जनकल्याण के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्वच्छता विभाग, परिवहन विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग और पेयजल विभाग जैसे प्रमुख विभागों में राशि की कमी से जनता को सीधी असुविधा हो रही है। इन विभागों में खर्च की कमी से साफ-सफाई, परिवहन सेवाएं, राशन वितरण और पानी की उपलब्धता जैसी मूलभूत सेवाओं पर असर पड़ रहा है, जिससे राज्य की जनता की परेशानियां बढ़ गयी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम नहीं उठाये, तो झारखंड की विकास दर और जनकल्याण कार्यों में और भी रुकावट आयेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से अपील की, कि वे जनता के मुद्दों पर ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि सरकारी धन का सही तरीके से और जनहित में उपयोग किया जाये।



