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अरे यह कैसी बात! आपके ग्रह भी सोते- जागते हैं, सो गए तो भाग्य का कबाड़ा…

अरे यह कैसी बात! आपके ग्रह भी सोते- जागते हैं, सो गए तो भाग्य का कबाड़ा…

Dharm adhyatm : ज्योतिषाचार्य किसी की जिंदगी की कुंडली बनाते हैं, तो उसमें जिंदगी के तमाम पक्षों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव का एक प्रकार से विश्लेषण कर डालते हैं। आज के समय में कोई माने अथवा ना माने, लेकिन इसका एक वैज्ञानिक आधार है कि जीवन पर ग्रहोन और नक्षत्रों का प्रभाव पड़ता है। इनकी टेढ़ी नजर से जीवन में सब कुछ विषम हो जाता है और ऐसी स्थिति में इस समस्या का समाधान भी कुंडली के जानकार ज्योतिष आचार्य ही निकलते हैं। ज्योतिष के आचार्य बताते हैं कि आपके ग्रह भी सोते-जागते रहते हैं। यह थोड़ा सुनने में अटपटा लगता है, लेकिन बात स्पष्ट रूप से सही है। जब आपके ग्रह सोते हैं तो भाग्य का कबाड़ा निकल जाता है, जागते हैं तो आपकी किस्मत चमक उठती है। हम जानते हैं कि सोए ग्रहों को जगाया कैसे जाए। लाल किताब से इसकी जानकारी मिलती है।

प्रभाव का परिणाम महत्वपूर्ण

ज्योतिष के कुशल जानकार कहते हैं कि लाल किताब में भाव की प्रधानता है। ग्रह का बहुत महत्व का होता है। ग्रह के सोने में दृष्टि का बहुत महत्व है। लाल किताब में जो दृष्टि का सिद्धांत है, वह तय करता है कि कौन सा ग्रह सोया हुआ है। ग्रह के सोया होने का तात्पर्य यह है कि ग्रह शुभ परिणाम देने में कमजोर हो जाता है। याद लगाए कि जब कोई भी ग्रह सोया हुआ हो तो उसे बलवान बनाने के लिए उस ग्रह का उपाय किया जाता है। इससे वह ग्रह शुभ फलदायी बन जाता है। इसके लिए लाल किताब की कुंडली में अन्य विशेष ग्रह को भाव में बैठाना पड़ता है।

किस स्थिति के लिए क्या करना है उपाय

ध्यान रखना होगा कि ग्रहों का शुभ फल पाने के लिए ग्रह से संबंधित उपाय करने होते हैं।  कुंडली का प्रथम भाव सोया हुआ हो, उसे जाग्रत करने के लिए मंगल का उपाय किया जाता है। ज्योतिष के आचार्य कहते हैं कि अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चंद्रमा के, तीसरे घर को जगाने के लिए बुध के, चौथे घर के लिए चंद्र के, पांचवें घर के लिए सूर्य के, छठे घर के लिए राहु के, सातवें के लिए शुक्र के, आठवें के लिए चंद्र, नौवें के लिए गुरु, दशम के लिए शनिदेव के, 11वें भाव के लिए गुरु के और 12वें भाव के लिए की गुरु या केतु के उपाय किए जाते हैं।

कर्म को ठीक करें, किसी उपाय की जरूरत नहीं

लाल किताब कि अगर मानें और समझें तो अपने कर्म को सही रखना चाहिए। आपको ज्योतिष के किसी उपाय या किसी भी तरह की पूजा-पाठ करने की जरूरत नहीं होगी। यह आचार संहिता कुंडली के भावों के अनुसार निर्मित होती है।

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