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शुगर की बीमारी और हड्डियों की कमजोरी से जूझ रहे हैं, तो गोमुखासन बनेगा रामबाण…

शुगर की बीमारी और हड्डियों की कमजोरी से जूझ रहे हैं, तो गोमुखासन बनेगा रामबाण…

Health tips, Lifestyle, Gomukhasana : यह सही है कि उम्र के साथ कई बीमारियां भी आती हैं, लेकिन उम्र के पहले भी आज की जीवन शैली और तनाव भरे दौर में हम कई बीमारियों से परेशान हो जाते हैं। इसलिए दवा के साथ-साथ योगासन का पालन करना हमारे लिए अधिक फायदेमंद होता है। भारतीय परंपरा में ध्यान और योग का महत्व इसलिए बताया गया है, ताकि हम अपनी बिगड़ती सेहत पर खुद ही नियंत्रण कर सकें। आज हम आपको गोमुखासन की खासियत की जानकारी दे रहे हैं। ऐसा आसन जो किडनी की बीमारियों से लेकर शुगर से उत्पन्न होने वाली परेशानी और हड्डियों की कमजोरी को नियंत्रित करने में सक्षम है।

नामकरण का कारण और फायदा

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इस आसन को गोमुखासन क्यों कहा जाता है। वास्तव में गोमुखासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है- गऊ और मुख। गऊ यानी गाय और मुख यानी चेहरा। गोमुखासन को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस आसान में आपके जांघ और पिंडली गाय के चेहरे के समान मुद्रा में होते हैं।

शुरू में 10 मिनट तक करें अभ्यास

यह आसन करने से जांघों, कूल्हों, ऊपरी पीठ, ऊपरी बांह और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। विश्राम करने के लिए गोमुखासन एक उत्तम आसन है।यदि 10 मिनट या अधिक के लिए आप इसका अभ्यास करें, तो यह थकान, तनाव और चिंता को कम करेगा। अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। इस आसन से पीठ दर्द, साएटिका, गठिया और कंधे और गर्दन में कठोरता से राहत मिलती है।

इस तरीके का धीरे-धीरे करें पालन

बायीं टांग को मोड़ें और शरीर के करीब खींच लें। अपने दाहिने घुटने को उठाएं और बाएं पैर को दाहिनी जांघ के नीचे टीका लें ताकि वह नितंब को छू सके। दाहिनी टांग को शरीर की ओर खींचें और बाएं जांघ के ऊपर से इसे घुमा कर रख लें ताकि पैर जमीन पर टिका हो। बाएं हाथ को पीठ पर टिकाएं और दायें हाथ को उठा कर कंधे के उपर से ले जा कर पीठ पर टिकाएं। बाएं हाथ का पिछला हिस्सा रीढ़ की हड्डी पर टीका होना चाहिए। दाहिने हाथ की हथेली रीढ़ की हड्डी पर टिकी होनी चाहिए। अब पीठ के पीछे ही दोनों हाथों को एक दूसरे से पकड़ने की कोशिश करें।

इस प्रकार आगे पूरा करें गोमुखासन

अब दाहिने हाथ को सिर के पीछे ले आएं, ताकि सिर हाथ के अंदर के भाग को छू सके। रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी होनी चाहिए और सिर आगे की ओर बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आंखें बंद कर लें। इस मुद्रा में 2 मिनट तक रहें। आसान से बाहर निकालने के लिए हाथों को खोलें, टांगों को सीधा कर लें। फिर दूसरी तरफ दोहराएं।

यह दिक्कत आए तो ना करें गोमुखासन

कई लोगों के लिए शुरुआत में अक्सर दोनों कूल्हे समान रूप से फर्श पर नहीं टिक पाते हैं। इस वजह से घुटने एक दूसरे के ऊपर रखने में मुश्किल हो सकती है और रीढ़ की हड्डी ठीक से सीधी नहीं हो पाती। अगर आपके कंधों में लचीलापन कम हो तो आप हाथों को पकड़ने में कठिनाई का सामना कर सकते हैं। यदि आपको गंभीर गर्दन या कंधे की समस्या है, तो गोमुखासन ना करें।

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