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नारायणपुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों में मुठभेड़,नक्सलियों को आर्थिक नुकसान

नारायणपुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों में मुठभेड़,नक्सलियों को आर्थिक नुकसान

▪︎ अबूझमाड़ इलाके से लाखों की नकदी और विस्फोटक बरामद

▪︎ मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने का दावा 

Narayanpur News : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों के माड़ डिवीजन के साथ हुई मुठभेड़ के बाद नक्सलियों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। हालांंकि, नक्सली वहां से भाग निकलने में सफल रहे। सुरक्षाबलों ने उनके डेरे से छह लाख की नकदी, 11 लैपटाॅप, वॉकी-टॉकी सहित विस्फोटक पदार्थ और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की है। सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार अबूझमाड़ के कोहकमेटा थाना क्षेत्रांतर्गत कसोड़-कुमुरादी के जंगल और आसपास के क्षेत्रों में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर पदमकोट कैम्प से बीते सोमवार को डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) आईटीबीपी (इंडियन तिब्बतन बार्डर पुलिस) 41वीं वाहिनी का संयुक्त बल नक्सल विरोधी अभियान पर था। सर्चिंग गश्त के दौरान मंगलवार को कसोड़-कुमुरादी के बीच जंगल पहाड़ी में सुरक्षा बलों का सामना हथियारबंद वरिष्ठ नक्स्ली कैडरों के साथ हुआ। दो से तीन घंटे भीषण मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को भारी पड़ता देख नक्सली नकदी रकम सहित विस्फोटक सामग्री एवं दैनिक उपयोगी सामग्री छोड़ जान बचा कर भाग निकले। फायरिंग बंद होने के बाद सुरक्षाबलों के क्षेत्र के सघन सर्चिंग में घटनास्थल से छह लाख रुपये नकदी, 11 लैपटाप, 50 किग्रा बारूद, 30 किग्रा शोरा नामक पदार्थ, 20-20 लीटर पेट्रोल-डीजल, दो कुकर बम, एसएलआर के 130 जिंदा कारतूस, 12बोर के 25 जिन्दा कारतूस 25 नग, .303 रायफल के 18 जिंदा कारतूस, कार्डेक्स वायर दो बंडल, बिजली वायर 10 बंडल, एक नक्सली वर्दी, विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रानिक डिवाइस, दवाइयां, टिफिन, नक्सल साहित्य, जूते सहित अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद कर सुरक्षाबलों के जवान शुक्रवार को सुरक्षित वापस लौटे हैं।

पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने दी जानकारी

पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने शुक्रवार को बताया कि सुरक्षाबलों के अबूझमाड़ के कसोड़-कुमुरादी के जंगल में की गयी कार्रवाई से नक्सलियों को भारी आर्थिक और रणनीतिक क्षति हुई है। उन्हें यह साफ संदेश गया है कि अब वे माड़ के किसी क्षेत्र में सुरक्षित नहीं है। उनके आश्रय स्थल सिमटते जा रहे हैं। नक्सली संगठन के पास अब हिंसा छोड़ कर आत्मसमर्पण करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। इसलिए नक्सली संगठन से अपील है कि वे तत्काल हिंसात्मक गतिविधियों को छोड़ कर समाज की मुख्यधारा में जुडे़ं ; अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें।

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