Ranchi news : जेएससीए अपनी दोरंगी नीति, गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और पक्षपातपूर्ण फैसले लेने में अब महारथ हासिल करता जा रहा है। ताजा मामला चाईबासा क्रिकेट संघ से जुड़ा है। हम बात कर रहे हैं चाईबासा प्रीमियम क्रिकेट लीग की। इस टूर्नामेंट में झारखंड के सभी जिलों के क्रिकेटर हिस्सा ले रहे हैं। इसके लिए खिलाड़ियों की नीलामी भी हो रही है। ऐसा ही टूर्नामेंट लोहरदगा जिला क्रिकेट संघ साल 2018 से आयोजित करता आ रहा है, लेकिन इस साल लोहरदगा में आयोजित टूर्नामेंट में दूसरे जिलों के खिलाड़ियों के खेलने पर जेएससीए ने पाबंदी लगा दी थी। जेएससीए के इस फैसले से लोहरदगा में आयोजित टूर्नामेंट इस बार उतनी सुर्खियां नहीं बटोर पाया। इस बाबत जेएससीए ने सभी जिला संघों को पत्र लिखकर बताया था कि जेएससीए भी जेपीएल आयोजित करता है। ऐसे टूर्नामेंट से जेपीएल के आयोजन पर असर पड़ेगा। अब कुछ ही महीने बाद जब चाईबासा क्रिकेट संघ के तत्वावधान में चाईबासा प्रीमियम क्रिकेट लीग आयोजित हो रहा है तो इसमें अन्य जिलों के खिलाड़ी कैसे खेल रहे हैं। क्या जेएससीए ने इसका परमिशन दिया है या बिना किसी परमिशन के चाईबासा क्रिकेट संघ ऐसा कर रहा है। जेएससीए द्वारा सभी जिला संघ को चिट्ठी जारी करने के बाद भी चाईबासा क्रिकेट संघ यह आयोजन कर रहा है तो क्या उस पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
एक ही तरह के मामले में अलग-अलग फैसला क्यों ?
अब सवाल उठता है कि जेएससीए एक ही तरह के मामले में अलग-अलग फैसला क्यों करता है। चाईबासा क्रिकेट संघ टूर्नामेंट आयोजित करें और उसमें दूसरे जिलों के क्रिकेटरों को खिलाए तो जेएससीए चुप्पी साथ लेता है और दूसरे जिला संघ टूर्नामेंट में दूसरे जिलों के खिलाड़ी को खिलाई तो जेएससीए चिट्ठी जारी कर देता है। क्या जेएससीए के सचिन सौरव तिवारी यह बता सकते हैं कि वह चाईबासा क्रिकेट संघ के सामने हर मामले में नतमस्तक क्यों हो जाते हैं। क्या चुनाव में मदद की वे अब तक कीमत चुका रहे हैं।

ओवर एज मामले में भी नहीं हुई कार्रवाई
इसके पूर्व भी बंगाल के 27 वर्षीय दो क्रिकेटरों को चाईबासा से अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट में खिलवाने को लेकर बवाल मचा था। यह मामला देशभर में चर्चित हुआ था। बीसीसीआई को भी इस मामले में संज्ञान लेना पड़ा था। लेकिन जेएससीए ने इस मामले में चाईबासा क्रिकेट संघ को एक नोटिस तक भेजना मुनासिब नहीं समझा। उल्टे चाईबासा क्रिकेट संघ को उपकृत करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाए। किसी भी संस्था या व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि चुनाव में हार- जीत तो लगी रहती है। लेकिन कुर्सी पर बैठकर पक्षपात पूर्ण फैसला करने वालों की हालात आगे चलकर पेड़ से गिरे बंदर की तरह हो जाती है।



