Dhanbad News : धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के अध्यक्ष मनोज कुमार के लगभग 25 वर्षों के कार्यकाल को लेकर संघ के भीतर असंतोष और सवाल लगातार तेज होते जा रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि शुरुआती एक-दो कार्यकाल में उन्होंने सभी का विश्वास जीता और सिंह मेंशन की पहचान का लाभ उठाते हुए संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया, लेकिन बाद के वर्षों में ऐसे नियम और व्यवस्थाएं बनाई गईं, जिनसे नेतृत्व को चुनौती देना लगभग असंभव हो गया।
परिवार और करीबी लोगों को सदस्य बनाया
आरोप है कि DCA के मंच का उपयोग कर मनोज कुमार झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) में उपाध्यक्ष बने और जब जिलों को 20-20 आजीवन सदस्य बनाने का अवसर मिला, तब अपने परिवार और करीबी लोगों को सदस्य बनाकर भविष्य की चुनावी रणनीति तैयार की गई। विरोधियों का कहना है कि इन्हीं वोटों के आधार पर वर्षों से JSCA की राजनीति में प्रभाव बनाए रखा गया।
वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल
विरोध करने वाले सदस्यों का आरोप है कि DCA के नियमों के अनुसार चुनाव वही लड़ सकता है जो पहले से मैनेजिंग कमेटी का सदस्य हो। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और नए लोगों के लिए नेतृत्व तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। संघ में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि JSCA से विभिन्न मदों में आने वाली राशि और उसके खर्च की जानकारी सीमित लोगों तक ही रहती है। सदस्यों का कहना है कि किसी भी खेल संगठन में आय-व्यय की पूरी जानकारी सभी पदाधिकारियों और सदस्यों के सामने रखी जानी चाहिए।

रामनाथ सिंह मेमोरियल और वीणा मेमोरियल टूर्नामेंट में खर्च को लेकर भी उठ रहे सवाल
विक्षुब्ध गुट के सदस्य परिवारवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। आरोप है कि बेटा, भाई, भतीजा, भगना तथा अन्य करीबी रिश्तेदारों को DCA और JSCA का आजीवन सदस्य बनाकर चुनावी बढ़त सुनिश्चित की गई। वहीं, रामनाथ सिंह मेमोरियल और वीणा मेमोरियल टूर्नामेंट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि यदि ये प्रतियोगिताएं निजी नामों पर आयोजित होती हैं तो इनके आयोजन में होने वाले खर्च की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। आलोचकों का यह भी कहना है कि पिछले 25 वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को सदस्य बनाया गया जिनका क्रिकेट से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। उनका आरोप है कि इससे खिलाड़ियों की भागीदारी और संघ की खेल संस्कृति प्रभावित हुई। खिलाड़ियों के लिए मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि JSCA द्वारा जिला क्रिकेट और बोर्ड मैचों के लिए मिलने वाली राशि का पूरा लाभ खिलाड़ियों तक नहीं पहुंचता, जिसके कारण धनबाद की मेजबानी, खानपान और व्यवस्थाओं पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
एलीट ग्रुप से गिरकर प्लेट ग्रुप में पहुँचा धनबाद
पूर्व क्रिकेटरों ने धनबाद के प्रदर्शन पर भी असंतोष जताया है। एक समय राज्य क्रिकेट में मजबूत पहचान रखने वाला धनबाद अब प्लेट ग्रुप तक सीमित हो गया है। कहने का मतलब यह है कि धनबाद ए डिवीजन से अब बी डिवीजन में पहुंच गया है। विरोधियों का दावा है कि अंडर-16, अंडर-19, अंडर-23 और रणजी ट्रॉफी में धनबाद के खिलाड़ियों की संख्या लगातार घटी है। प्रतिभाओं के विकास के लिए धनबाद क्रिकेट संघ की ओर से अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए।
इसके अलावा लीग मैचों की संख्या कम करने, पंजीकरण शुल्क बढ़ाने, क्लब बदलने पर ट्रांसफर फीस लेने, चयन प्रक्रिया को कुछ लोगों तक सीमित रखने और वाकओवर होने पर भारी भरकम जुर्माना लगाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। वर्तमान कमेटी पर यह भी आरोप है कि DCA के संसाधनों का उपयोग निजी और अन्य चुनावी हितों के लिए किया गया। इन सभी आरोपों के आधार पर विरोधी गुट का कहना है कि धनबाद क्रिकेट के विकास के लिए संघ में नेतृत्व परिवर्तन समय की आवश्यकता बन गया है।
नाखून कटाकर शहीद बनने की कोशिश
जब सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का आदेश दिया था तो डीसीए अध्यक्ष मनोज कुमार ने जेएससीए से सबसे पहले इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने नाखून कटा कर शहीद बनने की कोशिश की थी। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने धनबाद क्रिकेट संघ में अपने नाते रिश्तेदारों को आजीवन सदस्य बनाकर और प्रबंध समिति में शामिल कराकर संघ पर एक तरह से कब्जा कर लिया। इसी का नतीजा है कि वह पिछले 25 वर्षों से धनबाद क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बने हुए हैं। धनबाद क्रिकेट संघ के मामले में उनकी नैतिकता कहां गईं। क्या वह बता सकते हैं कि उन्होंने किन परिस्थितियों में 40 से ज्यादा रिश्तेदारों को धनबाद क्रिकेट संघ का आजीवन सदस्य बना कर उन्हें वोटिंग का अधिकार दिया। वैसे धनबाद क्रिकेट संघ से जुड़े तमाम लोग अब यह जान चुके हैं कि मनोज कुमार नाखून कटा कर शहीद बनना चाहते थे, लेकिन यह सपना उनका पूरा होने वाला नहीं है। क्योंकि ये पब्लिक है सब जानती है।



