Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:


Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:

☀️
–°C
Fetching location…

श्राप से वरदान तक : नल-नील और सेतु निर्माण की अद्भुत कथा

श्राप से वरदान तक : नल-नील और सेतु निर्माण की अद्भुत कथा

Ramayan, Dharm adhyatm : नल और नील, वानर योद्धा, किष्किन्धा की सेना के पराक्रमी सेनापति और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बचपन में उनकी शरारतों ने एक ऐसा श्राप दिलाया, जो आगे चलकर रामायण के सबसे अद्भुत अध्याय समुंद्र पर सेतु निर्माण का कारण बना?

चंचलता का परिणाम : ऋषियों का श्राप

नल और नील, वानर जाति से थे और बाल्यावस्था में अत्यंत चंचल थे। वे ऋषि-मुनियों के साथ रहते थे, लेकिन उनकी तपस्या के समय शांति भंग कर देते। वे मुनियों का सामान चुरा कर नदी या समुद्र में फेंक देते। यह शरारत जब हद से बढ़ीं तो एक दिन एक ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया — “अब से तुम जो भी वस्तु जल में फेंकोगे, वह डूबेगी नहीं, बल्कि तैरेगी।”

श्राप बनावरदान

समय बीता। जब माता सीता की खोज और रावण से युद्ध के लिए श्रीराम को समुद्र पार करना पड़ा, तब नल और नील का यही श्राप उनके लिए वरदान बन गया। समुद्र देव ने स्वयं प्रकट होकर इस श्राप की महिमा श्रीराम को बताई। नल और नील द्वारा फेंके गए पत्थर समुद्र में डूबे नहीं, बल्कि तैरने लगे।

पांच दिन में बना 100 योजन लंबा सेतु

नल और नील ने पूरी वानर सेना की मदद से केवल पांच दिनों में 100 योजन लंबा सेतु समुद्र पर बना दिया, जिस पर चलकर भगवान श्रीराम और उनकी सेना लंका पहुंची । यह श्राप, जो एक समय दंड था, अब साक्षात धर्म की विजय का सेतु बन गया।

Share this:

Latest Updates