▪︎ देश के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस, 06 महीने का कार्यकाल
New Delhi News: 24 नवम्बर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती की एक स्लम बस्ती में जन्में जस्टिस बीआर गवई (भूषण रामकृष्ण गवई) ने बुधवार को भारत के 52वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। भूषण ने बचपन से ही कठिन परिस्थितियों का सामना किया और मेहनत से आज इस ऊंचे पद तक पहुंचे हैं। सीजेआई ने एक साधारण स्कूल में पढ़ाई की और हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं ; चाहे वह आर्थिक सहायता हो या इलाज का खर्च। उन्होंने 1985 में कानूनी करियर शुरू किया। 1987 में बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। इससे पहले उन्होंने पूर्व एडवोकेट जनरल और हाईकोर्ट जज स्वर्गीय राजा एस भोंसले के साथ काम किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस गवई को सीजेआई पद की शपथ दिलायी। मौजूदा सीजेआई संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई को खत्म हो चुका है। सीजेआई खन्ना के बाद वरिष्ठता सूची में जस्टिस गवई का नाम था। इसलिए जस्टिस खन्ना ने उनका नाम आगे बढ़ाया। हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ 06 महीने का है। सीजेआई गवई देश के दूसरे दलित और पहले बौद्ध चीफ जस्टिस हैं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दिये प्रोफाइल के मुताबिक, जस्टिस गवई 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में प्रमोट हुए थे। उनके रिटायरमेंट की तारीख 23 नवम्बर 2025 है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केन्द्रीय मंत्री भी मौजूद रहे।



