Latehar News: झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उग्रवादी संगठन जेजेएमपी (झारखंड जनमुक्ति परिषद) के सबजोनल कमांडर बैजनाथ सिंह ने बुधवार को लातेहार पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया। डीआईजी पलामू रेंज नौशाद आलम, पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव और सीआरपीएफ की 11वीं बटालियन के कमांडेंट याद राम बुनकर की उपस्थिति में बैजनाथ ने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिये। सरेंडर के दौरान बैजनाथ सिंह के साथ उनकी पत्नियां और परिवारजन भी मौजूद थे। इस दौरान अधिकारियों ने बुके, शॉल और माला भेंट कर उनका स्वागत किया और मुख्यधारा में लौटने पर बधाई दी। मौके पर डीआईजी नौशाद आलम ने कहा कि कई युवा भ्रमित होकर उग्रवाद की राह पर चल पड़े हैं, लेकिन सरकार की नीतियां उन्हें फिर से समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर दे रही हैं। उन्होंने अपील की, कि अन्य उग्रवादी भी इसी तरह आत्मसमर्पण कर, पुनर्वास योजना का लाभ लें।
कई आपराधिक मामलों में था नाम
पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने बताया कि बैजनाथ सिंह पर लातेहार जिले के विभिन्न थानों में कुल सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 17 सीएलए और आर्म्स एक्ट की गम्भीर धाराएं शामिल हैं। वह लम्बे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ था। कमांडेंट याद राम बुनकर ने कहा कि जंगल में जीवन नहीं है। जो सरेंडर नहीं करेंगे, उन्हें पुलिस की गोली का सामना करना पड़ेगा।
चार साल रहा सक्रिय, अत्याधुनिक हथियार भी किया इस्तेमाल
सैलदाग, मनिका निवासी बैजनाथ सिंह ने 2020 में भाकपा माओवादी से अपने उग्रवादी जीवन की शुरुआत की थी। एक साल बाद वह जेजेएमपी के कुख्यात नेता मनोहर गंझू के दस्ते में शामिल हो गया। मनोहर के सरेंडर के बाद वह अखिलेश यादव के साथ सक्रिय रहा और सबजोनल कमांडर बन गया। इस दौरान उसने एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग कर लातेहार, बरवाडीह, हेरहंज, छिपादोहर और मनिका क्षेत्रों में कई घटनाओं को अंजाम दिया।



