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राजनीतिक दल एसआईआर पर भ्रम न फैलायें, सुधार के लिए दर्ज करायें आपत्ति : चुनाव आयोगनयी

राजनीतिक दल एसआईआर पर भ्रम न फैलायें, सुधार के लिए दर्ज करायें आपत्ति : चुनाव आयोगनयी

Delhi : चुनाव आयोग लगातार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत राजनीतिक दलों से भ्रम न फैलाने और प्रक्रिया में भागीदारी की अपील कर रहा है। आयोग का कहना है कि नियम के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। हर स्तर पर राजनीतिक दलों से जानकारी साझा की जा रही है। अभी तक दलों की ओर से कोई आपत्ति या दावे नहीं आये हैं।आयोग ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि जमीनी स्तर पर एसआईआर की प्रक्रिया में राजनीतिक दल भाग ले रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया में जिनके नाम हटाये गये हैं, उनकी जानकारी भी राजनीतिक दलों से साझा की गयी है। उनसे अपील की गयी है कि वे अपनी आपत्तियां और दावे एक माह के भीतर दे सकते हैं। अभी तक किसी राजनीतिक दल ने कोई दावा या आपत्ति नहीं दी है।आयोग के अनुसार चार कारणों से कुछ मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है। यह चार कारण हैं कि मतदाता की मृत्यु हो गयी है। मतदाता स्थानांतरित हो गया है। मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत है। इसके अलावा ऐसे मतदाता, जिन्हें कम से कम तीन बार बूथ स्तर के अधिकारी ने सम्पर्क करने की कोशिश की और सम्पर्क नहीं हो पाया।इसी क्रम में आज एक भ्रम फैलानेवाला समाचार आया कि बिहार के समस्तीपुर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसे साझा किया और लिखा कि यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि बिहार में ‘इलेक्टोरल रोल रिवीजन’ की पूरी प्रक्रिया धोखाधड़ी है। यह वोट चोरी करने का तरीका है।चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। स्पष्टीकरण समस्तीपुर के जिला प्रशासन की ओर से आया है। जिला प्रशासन का कहना है कि कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। किसी ने जान-बूझ कर आवेदन दिया था और जांच के क्रम में यह गलत पाया गया है। इस पर एफआईआर भी कर दी गयी है तथा इस पर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। ऐसे किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा।इसी बीच एआईएमआईएम के नेता असद्दुदीन औवेसी का बयान आया है। उनका कहना है कि बिहार के एसआईआर का नतीजा साफ है- 56 लाख लोगों के नाम काट दिये गये हैं। सबसे ज्यादा नाम उन जिÞलों से कटे हैं जहां मुसलमानों की आबादी ज्यादा है और जहां के लोग रोजगार की तलाश में मजबूरी में देश के दूसरे हिस्सों में पलायन करते हैं।इसपर और रणदीप सिंह सूरजेवाला के बयान पर आयोग ने फिर कहा है कि अगर किसी मतदाता का नाम कटा है, तो उन्हें दावे और आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रेरित करें।चुनाव आयोग के प्रवक्ता का कहना है कि चुनाव आयोग बार-बार कह रहा है कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में कोई भी योग्य मतदाता छूटने ना पाये और कोई भी अयोग्य मतदाता जुड़ने न पाये। इसके लिए 01 अगस्त को जारी की गयी बिहार की प्रारूप मतदाता सूची में कोई भी त्रुटि दूर करने के लिए अपने दावे और आपति दर्ज करें। अफसोस है कि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी दावा या आपत्ति नहीं दर्ज की है। केवल मतदाताओं की ओर से 3,659 दावे आये हैं।

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