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एसआईआर लागू होने से पहले बंगाल के सीमावर्ती जिलों में जन्म प्रमाणपत्रों में अचानक वृद्धि

एसआईआर लागू होने से पहले बंगाल के सीमावर्ती जिलों में जन्म प्रमाणपत्रों में अचानक वृद्धि

Kolkata : बिहार में एसआईआर को लेकर मचे राजनीतिक हंगामे के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी इस प्रक्रिया की शुरुआत होनेवाली है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बार-बार आश्वासन दे रही हैं कि राज्य के किसी भी निवासी को अगर ‘गैर-भारतीय’ घोषित किया गया, तो सरकार उनके पक्ष में आन्दोलन करेगी। इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक आंकड़े ने प्रशासनिक हलकों में चिन्ता बढ़ा दी है। विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा स्वीकृत जन्म प्रमाणपत्रों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, खासकर बांग्लादेश से सटे जिलों में।
मालदह इस सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद मुर्शिदाबाद और बीरभूम का स्थान है। आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में राज्यभर में ग्राम पंचायतों से 44229 जन्म प्रमाणपत्र स्वीकृत हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 55921 हो गये। 2025 में 15 जुलाई तक ही 23026 प्रमाणपत्र स्वीकृत हो चुके हैं। केवल मालदह जिले में कई पंचायतों में वृद्धि दर सैकड़ों प्रतिशत तक पहुंच गयी है। जैसे मानिकचक के उत्तर चंडीपुर पंचायत में 273 प्रतिशत और कालियाचक-3 के बखराबाद पंचायत में 383 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। इसी तरह मुर्शिदाबाद, बीरभूम, बांकुड़ा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना, झाड़ग्राम और हावड़ा के कई पंचायतों में भी जन्म प्रमाणपत्र पंजीकरण में भारी इजाफा हुआ है। हावड़ा के बानीबन पंचायत में यह वृद्धि 407 प्रतिशत तक पहुंच गयी। नवान्न ने सभी जिलाधिकारियों को इन मामलों की जांच का आदेश दिया है।
जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एसआईआर को लेकर लोगों में डर है, जिसके चलते पुरानी कागजी प्रमाणपत्रों को डिजिटल प्रमाणपत्र में बदला जा रहा है। कई मामलों में पंजीकरण संख्या वही रहती है, लेकिन पंचायत स्तर पर अनुमोदन संख्या बढ़ जाती है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सिंग होम की बढ़ती संख्या को भी इसके पीछे एक कारण माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इन दावों की सच्चाई जांच में सामने आयेगी। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गयी है। भाजपा नेताओं ने फिर से आरोप दोहराया है कि बंगाल सरकार बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा दे रही है और ये लोग तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक हैं। भाजपा का कहना है कि एसआईआर लागू होने से घुसपैठियों की पहचान होगी, इसी वजह से सत्तारूढ़ दल इसका विरोध कर रहा है।
कांग्रेस सांसद इशा खान चौधरी ने चेतावनी दी है कि एसआईआर के नाम पर वैध भारतीय नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए, जैसा कि असम और बिहार में देखने को मिला है। मालदह के जिलाध्यक्ष और मालतीपुर के तृणमूल विधायक अब्दुर रहीम बक्शी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी पंचायतों में पारदर्शिता के साथ प्रमाणपत्र जारी होते हैं और इसका घुसपैठ से कोई लेना-देना नहीं है।

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