• पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को तबाह करनेवाले अफसरों को मिला सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक
• पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनानेवाले लड़ाकू पायलटों को वीर चक्र सम्मान
New Delhi News: भारतीय सेनाओं के अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस पर दिये जानेवाले वीरता पुरस्कारों में इस साल ‘आॅपरेशन सिन्दूर’ का दबदबा रहा है। भारतीय सेना के उन दो अधिकारियों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से नवाजा गया है, जिन्होंने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को तबाह करने में अहम भूमिका निभायी थी। इसी तरह मुरीदके और बहावलपुर में आतंकवादी समूहों के मुख्यालयों और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनानेवाले लड़ाकू पायलटों सहित भारतीय वायु सेना के नौ अधिकारियों को वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक भारत का युद्ध काल में सबसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान है। इसकी शुरुआत 1980 में की गयी थी, तब से 45 वर्षों में अब तक केवल तीन अधिकारियों को ही इस पदक से सम्मानित किया गया है, जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल एएस कालकट, एयर मार्शल विनोद पटनी और लेफ्टिनेंट जनरल एचएम खन्ना हैं। यह पहला मौका है, जब एक साथ सेना के सात अधिकारियों को यह पदक प्रदान किया गया है।
उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा और सैन्य अभियान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा पश्चिमी नौसेना कमान के सेवानिवृत्त एफओसी वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी, वेस्टर्न एयर कमांडर एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्रा और डीजी एयर ऑपरेशन एयर मार्शल अवधेश भारती को ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
भारतीय वायु सेना के 26 अधिकारियों और वायु सैनिकों को वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया है, जिनमें वे लड़ाकू पायलट शामिल हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के अन्दर लक्ष्यों को भेदने के मिशन में भाग लिया था। इसमें वे अधिकारी और सैनिक भी शामिल हैं, जिन्होंने एस-400 और अन्य वायु रक्षा प्रणालियों का संचालन करके भारतीय धरती पर पाकिस्तान के योजनाबद्ध सभी हमलों को विफल कर दिया था।



