यह भले ही सामान्य सी बात लगे, परंतु है बहुत ही गंभीर मसला। हम हर दिन जिन रंग-बिरंगे धुले-धुलाए कपड़ों को पहनकर खुद पर इतराते हैं, वह कई मायनों में हमारे स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल असर भी डाल रहे हैं, जो कैंसर तक के वाहन बन रहे हैं। वही कपड़े हमारी त्वचा से सबसे ज़्यादा समय तक जुड़े रहते हैं। मगर क्या आपने कभी यह सोचा है कि कपड़ों को साफ करने वाला डिटर्जेंट, कहीं हमारी सेहत को गंदा तो नहीं कर रहा?
सफेदी के पीछे छिपा रसायनों का सच
चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि कई सामान्य डिटर्जेंट ऐसे रसायनों से भरे होते हैं, जो त्वचा से होते हुए शरीर के भीतर प्रवेश कर सकते हैं और कई बीमारियों के रूप में हमें प्रभावित करते हैं। सफेदी के पीछे छिपा रसायनों की सच्चाई की बात करें तो डिटर्जेंट की झाग, खुशबू और चमक हमें भले ही आकर्षित करे, लेकिन इनके पीछे छिपे रसायन खतरनाक हो सकते हैं। डिटर्जेंट में खुशबू के नाम पर डाले जाने वाले फ्थेलेट्स हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं। इनकी संबद्धता ब्रेस्ट कैंसर तक में पाए गए हैं। इसी तरह डायऑक्सेन की मौजूदगी भी कैंसर को आमंत्रित करते हैं। इसी तरह फॉर्मल्डिहाइड जहां सांस की बीमारी के वाहक हैं, वहीं बेंजीन भी श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। इसका लंबे संपर्क कैंसर के खतरे को जन्म देता है।
इन्हें सर्वाधिक खतरा
बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ये रसायन ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका शरीर इन रसायनों से लड़ने में अपेक्षाकृत आम शरीर की तुलना में सक्षम नहीं होता है।
क्या करें कि कपड़े स्वच्छ रहे और आप भी तंदुरुस्त
हम हर्बल, रसायनमुक्त डिटर्जेंट, बिना खुशबू या हल्की प्राकृतिक खुशबू वाले उत्पाद का इस्तेमाल कर हम जहां न सिर्फ अपने कपड़े को स्वच्छ रख सकते हैं, वहीं आप तंदुरुस्त भी रह सकते हैं। बेहतर होगा कि कपड़ों को धोने के बाद उसे अच्छी तरह धोएं, ताकि उसमें मौजूद रासायनिक तत्व बहुत हदतक दूर हो सके। साथ ही नए कपड़े पहनने से पहले उसे अच्छी तरह ज़रूर धोएं।



