झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) ने राज्य के विभिन्न जिलों—विशेषकर पलामू, पश्चिमी सिंहभूम सहित अन्य क्षेत्रों में हाल ही में किए गए सहायक आचार्य पदस्थापन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संघ का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया न केवल मनमानी से भरी है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का खुला उल्लंघन भी है। संघ ने इस संबंध में निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, झारखंड सरकार को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।
क्या हैं मुख्य आपत्तियां
JPSS के प्रदेश अध्यक्ष Pआनंद किशोर साहू एवं महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि पदस्थापन में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण का अभाव रहा है। कई शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड या समीपवर्ती क्षेत्र के बजाय 100 से 150 किलोमीटर दूर पदस्थापित कर दिया गया है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिला, विधवा, एकल अभिभावक, दिव्यांग तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों पर पड़ा है। विशेष चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि कई महिला शिक्षिकाओं को दूरस्थ, दुर्गम एवं जंगल-घिरे इलाकों में भेजा गया है, जो उनकी सुरक्षा और गरिमा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
संघ की तीन मांगें
- वर्तमान सहायक आचार्य पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
- सभी शिक्षकों से पाँच वैकल्पिक स्थानों की प्राथमिकता सूची लेकर नई, निष्पक्ष और मानवीय प्रक्रिया अपनाई जाए।
- शिक्षकों की परिस्थितियों, सुरक्षा और पारिवारिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए पुनः पदस्थापन सुनिश्चित किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो JPSS को राज्यव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। प्रतिनिधिमंडल में संघ की ओर से शंकर लकड़ा, जिवरा उरांव सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।



