Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:


Categories


MENU

We Are Social,
Connect With Us:

☀️
–°C
Fetching location…

Man Ki Baat: 100 वां एपिसोड में PM मोदी बोले, मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल…

Man Ki Baat: 100 वां एपिसोड में PM मोदी बोले, मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल…

National News Update Delhi, PM, Man Ki Baat, 100 Episode : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात प्रोग्राम का 100वां एपिसोड 30 अप्रैल को पूरा हो रहा है। यह एपिसोड टीवी चैनलों, निजी रेडियो स्टेशनों और सामुदायिक रेडियो सहित एक हजार से अधिक प्लेटफॉर्म पर ब्रॉडकास्ट किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क स्थित हेडक्वार्टर पर भी 100वां एपिसोड लाइव ब्रॉडकास्ट किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा- मन की बात कार्यक्रम नहीं, यह मेरे लिए आस्था,पूजा और व्रत है। जैसे लोग ईश्वर की पूजा करने जाते हैं तो प्रसाद की थाल लाते हैं। मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल जैसे है।

हजारों चिट्ठियां और संदेश

पीएम ने अपने संबोधन का प्रारंभ किया, आज मन की बात का 100वां एपिसोड है। मुझे आप सबकी हजारों चिट्ठियां और संदेश मिले। कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा चीजों को पढ़ पाऊं देख पाऊं। संदेशों को समझने की कोशिश करूं। कई बार पत्र पढ़ते वक्त भावुक हो गया, भावनाओं में बह गया और संभाला। 100वें एपिसोड पर सच्चे दिल से कहता हूं कि बधाई आपने दी, पात्र आप सभी श्रोता हैं। 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के मौके पर हम सबने मिलकर विजयादशमी के दिन मन की बात की यात्रा शुरू की थी। विजयादशमी यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। यह एक ऐसा पर्व बन गया है, जो हर महीने आता है। हम इसमें सकारात्मकता और लोगों की प्रतिभागिता को सेलिब्रेट करते हैं। यकीन नहीं होता कि इसे इतने साल गुजर गए। हर एपिसोड नया रहता है। देशवासियों की नई सफलताओं का विस्तार इसमें मिलता है। देश के कोने-कोने से हर आयु वर्ग के लोग जुड़े।

50 साल पहले घर छोड़ने की बात

पीएम बोले, जब मैं गुजरात का सीएम था, तब सामान्य तौर पर लोगों से मिलना-जुलना हो जाता था। 2014 में दिल्ली आने के बाद मैंने पाया कि यहां का जीवन और काम का स्वरूप अलग है। सुरक्षा का तामझाम, समय की सीमा सबकुछ अलग है। शुरुआती दिनों में खाली-खाली सा महसूस करता था। 50 साल पहले घर इसलिए नहीं छोड़ा था कि अपने ही देशवासियों से संपर्क नहीं हो पाएगा। देशवासी सबकुछ हैं और उनसे कटकर नहीं रह सकता था। मन की बात ने मुझे मौका दिया। पदभार और प्रोटोकॉल व्यवस्था तक सीमित रहा। जनभाव मेरा अटूट अंग बन गया। 

Share this:

Latest Updates