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DHANBAD : डुमरीजोड़ भू-धसान मामले में ख़त्म हुआ बीसीसीएल की टीम का रेस्क्यू ऑपरेशन, नहीं मिला कोई भी खदान के अंदर

DHANBAD : डुमरीजोड़ भू-धसान मामले में ख़त्म हुआ बीसीसीएल की टीम का रेस्क्यू ऑपरेशन, नहीं मिला कोई भी खदान के अंदर

धनबाद जिला अंतर्गत बीसीसीएल सीबी एरिया 12 चिरकुंडा थाना क्षेत्र के डुमरीजोड़ में अचानक जोरदार आवाज के साथ 50 फीट की सड़क धंस गई। इसके आसपास के इलाके में करीब 10 फीट जमीन धंस गई। घटनास्थल से 15 फीट की दूरी पर अवैध खनन के लिए कई मुहाने चल रहे थे। भू-धसान में कई लोगों के दबे होने की आशंका के बीच बीसीसीएल की टीम ने गुरुवार को ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया। घंटों चले ऑपरेशन के बाद भी बंद खदान के अंदर कोई भी व्यक्ति दबा हुआ नहीं मिला। शुक्रवार की सुबह बीसीसीएल का रेस्क्यू अभियान समाप्त हो गया।

खदान के खुले मुहाने को किया बंद

भू-धंसान के बाद बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम ने कई खुले मुहानों को बंद कर दिया। पुलिस की टीम मौके पर तैनात रही। स्थानीय लोगों की भारी भीड़ भी मौके पर इकट्ठा थी। बीसीसीएल के जीएम एके दत्ता एसडीएम प्रेम कुमार तिवारी, एसडीपीओ पीताम्बर सिंह खरवार समेत अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

बहुत दिन से हो रहा था अवैध कोयला खनन

भू-धंसान के कारण चिरकुंडा थाना क्षेत्र स्थित डुमरीजोड़ में करीब 50 फीट लंबी कच्ची सड़क धंस गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि जहां भू-धंसान हुआ है, उस क्षेत्र में काफी समय से अवैध खनन हो रहा था। इसी वजह से जमीन धंसी है। खास बात यह है कि जमीन करीब दस फीट तक धंस गई है। ग्रामीणों ने आशंका जतायी थी कि घटना के वक्त कई मजदूर आस-पास के इलाके में अवैध खनन कर रहे थे। ऐसे में कुछ लोगों के दबे होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अभी तक घटनास्थल पर किसी ने अपनों के दबे होने का दावा नहीं किया है। 

न कोई दवा है न कोई मरा है : डीसी

इधर, घटनास्थल पर मौजूद चिरकुंडा के थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि 21 अप्रैल को सुबह करीब साढ़े आठ बजे कच्ची सड़क धंस गई। घटना की  जानकारी बीसीसीएल को भी दे दी गई है। हालाकि किसी भी तरह से जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। वहीं धनबाद के डीसी ने कहा कि इस घटना में किसी के दबने या मरने या फिर घायल होने की सूचना नहीं है।

1975 से बंद थी खदान

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बीसीसीएल के जीएम एके दत्ता ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस क्रम में जीएमए के दस्ताने बताया कि यह करीब 70 से 80 साल पुरानी माइंस है, जो वर्षों से बंद है। इस खदान को 1975 में ही बंद कर दिया गया था। अवैध माइंस चलाए जाने को लेकर जीएम ने कहा कि इस तरह की सूचना मिलती है तो वहां मुहाने को बंद करने की कार्रवाई की जाती है। क्षेत्र काफी बड़ा होने के कारण हर स्थान का निरीक्षण करना संभव नहीं है, लेकिन फिर भी जो सूचनाएं मिलती हैं, उसके आलोक में कार्रवाई की जाती है।

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