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अदालत खफा : हाईकोर्ट ने दिया विशेष सचिव को हिरासत में रखने का आदेश, जुर्माना भी ठोका

अदालत खफा : हाईकोर्ट ने दिया विशेष सचिव को हिरासत में रखने का आदेश, जुर्माना भी ठोका

Prayagraj news, UP news :  उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विशेष सचिव को अवमानना के एक मामले में हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही में समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव रजनीश चंद्रा को अदालत उठने तक हिरासत में रखने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश पारित किया। हाईकोर्ट के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

हिरासत में लेने का आदेश पारित

सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिका सुमन देवी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर जस्टिस सलिल कुमार राय ने हिरासत में लेने का आदेश पारित किया। उन्होंने 4 मार्च के अदालती आदेश के बावजूद वेतन न मिलने का आरोप लगाया था। हाई कोर्ट ने कहा कि विशेष सचिव की ओर से मांगी गई माफी सही नहीं है। यह माफी कोर्ट को उन्हें अवमानना से मुक्त करने के लिए राजी नहीं करती है। कोर्ट ने कारण बताते हुए कहा कि यह माफी वास्तविक और ईमानदार नहीं है।

एक बजे तक हिरासत में रहे अधिकारी

हाई कोर्ट के आदेश के बाद विशेष सचिव रजनीश चंद्रा को अदालत के अधिकारी ने हिरासत में ले लिया। वे दोपहर 1 बजे तक हिरासत में रहे। आदेश पारित करते हुए हाई कोर्ट ने रजनीश चंद्रा की माफी को स्वीकार नहीं किया। हाई कोर्ट ने कहा कि विशेष सचिव की ओर से दोष मढ़ने का प्रयास किया। कोर्ट ने कहा कि इस अदालत की ओर से पारित 4 मार्च 2024 के आदेश के अनुसार आवेदक को वेतन का भुगतान रोकने में उनकी भूमिका का पता चलता है। विशेष सचिव की ओर से मांगी गई माफी ईमानदार नहीं है और कार्यवाही में दंड से बचने के लिए ही दी गई है।

वेतन भुगतान का है मामला

याचिकाकर्ता सुमन देवी डॉ. बीआर अंबेडकर शिक्षा सदन आबू नगर, फतेहपुर में कार्यरत थीं। उन्हें 10 अप्रैल 2022 को सेवानिवृत्त होना था। याचिकाकर्ता को सेशन लाभ दिया गया। उन्हें 31 मार्च 2023 को सत्र के अंत में रिटायर होने की अनुमति दी गई। जब सुमन देवी को नौकरी की पूरी विस्तारित अवधि के लिए वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट ने आवेदक की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने इस निर्देश के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया कि याचिकाकर्ता को 1 अप्रैल 2022 से सत्र के अंत तक उसका वेतन दिया जाएगा। इस पर कार्रवाई नहीं होने के बाद अवमानना याचिका दायर की गई थी।

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